टूटा था पैर, लेकिन कर दिया दिल का ऑपरेशन! महिला की मौत के बाद भी अस्पताल बोला- 'सर्जरी सफल रही'

पानीपत स्थित एक निजी अस्पताल से सामने आए मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पैर में फ्रैक्चर के इलाज के लिए अस्पताल पहुंची एक महिला की हार्ट सर्जरी किए जाने और उसके बाद हुई मौत ने पूरे घटनाक्रम को विवादों के घेरे में ला दिया है.

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पानीपत स्थित एक निजी अस्पताल से सामने आए मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पैर में फ्रैक्चर के इलाज के लिए अस्पताल पहुंची एक महिला की हार्ट सर्जरी किए जाने और उसके बाद हुई मौत ने पूरे घटनाक्रम को विवादों के घेरे में ला दिया है. मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन को सफल बताते हुए यह स्वीकार किया कि मरीज को बचाया नहीं जा सका. वहीं, परिजनों ने बिना लिखित सहमति के सर्जरी करने और मेडिकल दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं.

जांच में सामने आई थी दिल की गंभीर बीमारी

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, महिला के पैर का ऑपरेशन करने से पहले सामान्य मेडिकल जांच कराई गई थी. इन जांचों में कथित तौर पर दिल से जुड़ी गंभीर समस्या का पता चला, जिसके बाद डॉक्टरों ने पहले हार्ट सर्जरी करने का निर्णय लिया. अस्पताल का कहना है कि यह फैसला मरीज की स्थिति को देखते हुए लिया गया था. प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि डॉक्टरों द्वारा की गई हार्ट सर्जरी तकनीकी रूप से सफल रही, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद महिला की जान नहीं बचाई जा सकी.

लिखित सहमति को लेकर उठे गंभीर सवाल

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू मरीज की सहमति को लेकर सामने आया है. परिजनों का आरोप है कि हार्ट सर्जरी से पहले उनसे लिखित अनुमति नहीं ली गई और मेडिकल फाइल पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए. अस्पताल ने अपनी सफाई में स्वीकार किया कि फाइल पर दर्ज हस्ताक्षर अस्पताल के स्टाफ ने ही किए थे. हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि मरीज के साथ आए परिजनों ने मौखिक रूप से ऑपरेशन के लिए सहमति दी थी और खुद पढ़ा-लिखा न होने की बात कही थी, जिसके बाद स्टाफ ने उनकी ओर से नाम दर्ज कर दिया.

जांच के बाद होगी जिम्मेदारी तय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़ी सर्जरी से पहले मरीज या उसके अधिकृत परिजन की विधिवत और लिखित सहमति लेना चिकित्सा प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा होता है. ऐसे में यदि मेडिकल रिकॉर्ड पर अस्पताल कर्मियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं, तो यह गंभीर प्रक्रिया संबंधी सवाल खड़े करता है. फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चिकित्सा प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं.

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