श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील से एक चौंकाने वाली खोज सामने आई है. हाल ही में चलाए गए सफाई अभियान के दौरान झील से पाकिस्तान द्वारा दागे गए मिसाइल का मलबा बरामद हुआ है. यह मलबा भारत द्वारा हाल ही में चलाए गए "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान पाकिस्तान की असफल सैन्य कार्रवाई का अहम सबूत माना जा रहा है.
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पुष्टि की है कि यह मिसाइल पाकिस्तान की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के समय दागी गई थी, जिसका लक्ष्य कश्मीर के नागरिक क्षेत्र थे. भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम की सक्रियता के चलते यह मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और डल झील में गिर गई.
मलबे की बरामदगी: एक संयोग या साजिश का पर्दाफाश?
रविवार, 21 सितंबर को जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा डल झील में चलाए जा रहे सफाई अभियान के दौरान यह मलबा तब सामने आया, जब सफाईकर्मियों को झील की गहराई में एक भारी धातु का ढांचा मिला. जांच के लिए बुलाए गए बम डिस्पोज़ल दस्ते और विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर पुष्टि की कि यह एक मिसाइल के अवशेष हैं.
इसके तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके को घेर लिया और मलबे को जांच के लिए विशेष प्रयोगशाला भेज दिया गया है, जहां इसकी बनावट, स्रोत और तकनीकी संरचना की बारीकी से जांच की जा रही है.
पाकिस्तान की नाकाम कोशिश का जीता-जागता प्रमाण
पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के कई संवेदनशील इलाकों, विशेषकर जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाने की कोशिश की थी. इसमें उसने ड्रोन, मिसाइल और अन्य दूर-दराज से चलाए जाने वाले हथियारों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी. हालांकि, भारतीय सेना और वायुसेना ने उनकी हर कोशिश को विफल कर दिया.
डल झील से मिला मिसाइल मलबा इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया. परंतु भारत की सैन्य तैयारी ने इस हमले को पूरी तरह से नाकाम कर दिया.
ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान के खिलाफ भारत की कार्रवाई
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा अप्रैल 2025 में चलाया गया एक रणनीतिक सैन्य अभियान था, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. उस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.
भारत ने इस हमले का जवाब देने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई, जिसमें सिर्फ एलओसी पर जवाबी कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि पाकिस्तानी सीमा के अंदर घुसकर आतंकियों के लॉन्च पैड्स, ट्रेनिंग कैंप्स और हथियारों के डिपो को निशाना बनाया गया.
भारतीय वायुसेना ने नूरखान एयरबेस, मुरीदके, और कोटली सेक्टर जैसे ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिससे पाकिस्तान की रक्षा संरचना को भारी नुकसान पहुंचा.
भारतीय वायु रक्षा प्रणाली की बड़ी सफलता
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा छोड़े गए ड्रोन और मिसाइलों को भारत की एयर डिफेंस यूनिट ने समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया. डल झील में मिला मिसाइल मलबा इसी प्रणाली की सफलता का प्रमाण है. यदि यह मिसाइल अपने निशाने तक पहुंचती, तो श्रीनगर शहर में बड़ा नुकसान हो सकता था.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की S-400 और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की तैनाती ने पाकिस्तान की इस आक्रामक रणनीति को विफल कर दिया.
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