पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में चलाए केमिकल वेपन... बलूच नेता का बड़ा दावा, किस हद तक गिरेंगे मुनीर?

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

Pakistani army fired chemical weapons in Balochistan
Image Source: Social Media

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान की सेना और उसके चीफ असीम मुनीर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बलूच आबादी के खिलाफ केमिकल और फॉस्फोरस आधारित हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

मीर यार लंबे समय से पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग उठाते रहे हैं, और इस बार उन्होंने दावा किया है कि हाल के हफ्तों में कई इलाकों में ऐसे हमलों के सबूत मिले हैं जो पारंपरिक हथियारों से अलग हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन करते हैं.

बलूच इलाकों पर ड्रोन हमले- मीर यार का आरोप

सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में मीर यार ने कहा कि बलूचिस्तान के कई जिलों में हुए हवाई हमलों के बाद स्थानीय लोगों ने चट्टानों, पेड़ों और मलबे पर जली हुई पाउडर जैसी अजीब सामग्री देखी है, जो किसी केमिकल प्रतिक्रिया का संकेत देती है.

उनका दावा है—

  • कलात, खुजदार, मंगचर, बोलन, कोहलू, कहान, चगाई, पंजगुर और नोश्की जैसे इलाकों में सेना ने तेज हवाई निगरानी बढ़ाई है.
  • कई गांवों में ड्रोन हमले हुए हैं, और जहां मिसाइलें गिरीं वहां आग तेजी से भड़कने लगी.
  • मलबे पर पाए गए कणों में रासायनिक तत्वों के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं.

मीर यार ने अंतरराष्ट्रीय हथियार निरीक्षकों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे मौके पर जाकर जांच करें और पाकिस्तानी सेना के “गैरकानूनी ऑपरेशनों” का निष्पक्ष मूल्यांकन करें.

फॉस्फोरस और केमिकल हथियारों का उपयोग हुआ

बलूच मानवाधिकार और हथियार विशेषज्ञों का आरोप है कि पाकिस्तानी सैन्य अभियान में व्हाइट फॉस्फोरस, केमिकल स्मोक एजेंट और अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है.
इनका कहना है कि ऐसे हथियार युद्धक्षेत्र में भी सीमित परिस्थितियों में ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन नागरिक आबादी पर इनका उपयोग सीधे-सीधे युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है.

हथियार विशेषज्ञों का दावा है कि विस्फोटों के बाद जो आग तेजी से फैली, उसके पैटर्न और अवशेषों से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि यह सामान्य गोला-बारूद नहीं था.

पाकिस्तानी सेना का पुराना इतिहास- मीर यार का आरोप

मीर यार बलूच ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व पहले भी ऐसे हथियारों का उपयोग कर चुका है.

उनके अनुसार:

  • 2005 में जनरल परवेज़ मुशर्रफ के शासनकाल में कोहलू, काहन और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया था.
  • उस दौरान भी अंतरराष्ट्रीय संगठनों को शिकायतें भेजी गई थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई.
  • इसी निष्क्रियता ने सेना को और बेखौफ बना दिया, और आज वही घटनाएँ दोहराई जा रही हैं.

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

केमिकल वेपन्स कन्वेंशन (CWC) जो 1997 से लागू है, किसी भी देश को केमिकल हथियारों के विकास, स्टॉकपाइलिंग, ट्रांसफर और उपयोग से रोकता है. महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान CWC का सदस्य है.

सदस्य राष्ट्र होने के नाते उसे केमिकल हथियारों के उत्पादन और उपयोग की पूरी जानकारी OPCW (Organisation for the Prohibition of Chemical Weapons) को देनी होती है.

यदि जांच में पुष्टि होती है कि सेना ने नागरिक आबादी पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है, तो पाकिस्तान पर—

  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध,
  • युद्ध अपराध के केस,
  • और OPCW या अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की जांच जैसी प्रक्रियाएं शुरू हो सकती हैं.

असीम मुनीर की नेतृत्व शैली पर भी सवाल

मीर यार बलूच ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सेना बलूच लोगों के दमन की नई नीतियां चला रही है.

उनके अनुसार—

  • गायब किए गए लोगों की संख्या अचानक बढ़ी है.
  • हवाई और जमीनी ऑपरेशन तेज हुए हैं.

अब सेना ने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दुनिया ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो बलूचिस्तान में मानवीय संकट भयावह रूप ले सकता है.

ये भी पढ़ें- लाइव मैच में आया भूकंप, बीच में रोका गया मैच, डर गए आयरलैंड और बांग्लादेश के क्रिकेटर! देखें VIDEO