Middile East War: अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुई जंग अब अपने पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है. एक ओर जहां बातचीत की उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर जंग की स्थिति दिन-ब-दिन और जटिल होती जा रही है. पाकिस्तान ने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है, लेकिन जमीनी हालात जो संकेत दे रहे हैं, उससे लगता है कि उसकी कोशिशें नाकाम हो सकती हैं. आइए, समझते हैं वो 5 बड़े संकेत, जो युद्ध के और बढ़ने का इशारा कर रहे हैं.
1. जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, पेंटागन ने ईरान के खिलाफ जमीनी सैन्य अभियान की योजना तैयार कर ली है. इसका मुख्य लक्ष्य ईरान का खार्ग आइलैंड है, जो ईरान के तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका खार्ग की तेल पाइपलाइनों पर हमला 5 मिनट के नोटिस पर कर सकता है. इस बीच, USS त्रिपोली युद्धपोत पर सवार 2,500 मरीन कमांडो मध्य पूर्व के समुद्र में तैनात हो चुके हैं, साथ ही 82वीं एयरबोर्न डिवीजन को भी अलर्ट कर दिया गया है. यह क्षेत्र में पिछले दो दशकों में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैयारी मानी जा रही है.
2. ईरान का पलटवार और हमलों की बढ़ती तादाद
ईरान ने 18 और 19 मार्च को कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर दो बड़े हमले किए. इस हमले में पर्ल GTL गैस प्लांट और अन्य LNG सुविधाओं को भारी नुकसान हुआ. रास लाफान दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र है, और ईरान के इन हमलों का सालाना 20 अरब डॉलर के गैस निर्यात पर सीधा असर पड़ा है. वहीं, अमेरिका और इज़राइल भी ईरान के ऊर्जा और सैन्य ठिकानों पर हमले बढ़ा रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि संघर्ष तेज हो रहा है.
3. पाकिस्तान के प्रयासों के बावजूद बातचीत की उम्मीदें धुंधली
ईरान ने ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ बातचीत फिर से शुरू करने से साफ मना कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को मध्यस्थ के रूप में भेजने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह दौरा भी टल गया. ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलिबाफ ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत की खबरों को 'फेक न्यूज' करार दिया, जो यह दर्शाता है कि कूटनीतिक रास्ता अभी तक बंद है.
4. ट्रंप को युद्ध से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए युद्ध से बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं दिख रहा है. ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. ईरान का कहना है कि वह तभी युद्ध रोक सकता है, जब उसकी शर्तें मानी जाएं. यदि ट्रंप ईरान की शर्तों के आगे झुकते हैं, तो उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ेगा. और अगर वह नहीं झुकते, तो युद्ध और लंबा खिंच सकता है.
5. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का जंग में प्रवेश
28 मार्च को ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इज़राइल के दक्षिणी शहर बीयर शेबा पर मिसाइल हमले किए. यह यमन की इस युद्ध में पहली बड़ी दखलंदाजी थी. अमेरिकी मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन ने चेतावनी दी है कि हूती विद्रोही अब लाल सागर और अदन की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से हमले कर सकते हैं. इस तरह, जंग का दायरा और भी बढ़ता जा रहा है, जो इसे और भी खतरनाक बना सकता है.
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