Pakistan Water Crisis: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराना सिंधु जल समझौता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा इस संधि को स्थगित करने के फैसले का असर अब पाकिस्तान में साफ दिखाई देने लगा है. पानी की कमी से जूझ रहे सिंध और बलूचिस्तान के कई इलाके गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. खेत सूख रहे हैं, किसानों की चिंताएं बढ़ रही हैं और देश की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में यह संकट और गहरा सकता है.
सिंध और बलूचिस्तान में बढ़ी पानी की परेशानी
पाकिस्तान के दक्षिणी प्रांत सिंध और पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में इन दिनों पानी की भारी किल्लत देखने को मिल रही है. सिंध, जहां पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची स्थित है, सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है. नदियों और नहरों में पानी की घटती मात्रा ने खेती-किसानी पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है. स्थानीय किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है.
जल विशेषज्ञों का कहना है कि संकट केवल कृषि तक सीमित नहीं है. इसका असर लाखों लोगों की आजीविका, खाद्य उत्पादन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. सिंध और बलूचिस्तान में रहने वाली बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है, इसलिए पानी की कमी एक व्यापक सामाजिक और आर्थिक चुनौती बनती जा रही है.
पहलगाम हमले के बाद भारत ने अपनाया सख्त रुख
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण फैसला सिंधु जल संधि को रोकना भी था. भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते. हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोहराया कि भारत अपने फैसले से पीछे हटने का कोई इरादा नहीं रखता. उन्होंने कहा कि भारत अपने जल संसाधनों को उन लोगों तक नहीं पहुंचने देगा जो आतंकवाद को संरक्षण देते हैं. इस बयान ने भारत की नीति को और स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
सुक्कुर बैराज के आसपास सबसे गंभीर हालात
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सिंधु नदी पर बने सुक्कुर बैराज के आसपास पानी की कमी सबसे अधिक महसूस की जा रही है. यह बैराज पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई ढांचों में गिना जाता है और लाखों एकड़ कृषि भूमि को पानी उपलब्ध कराता है.
रिपोर्टों के मुताबिक, नॉर्थ वेस्ट नहर, राइस नहर और दादू नहर में पानी की भारी कमी दर्ज की गई है. कई इलाकों में नहरों का जलस्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया है. इससे खरीफ सीजन की फसलों की बुआई और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रही हैं.
पानी के बंटवारे पर उठ रहे सवाल
संकट के बीच पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद भी तेज हो गया है. सिंध के अधिकारियों का आरोप है कि पंजाब को उसके निर्धारित हिस्से से अधिक पानी दिया जा रहा है, जबकि सिंध को उसका पूरा अधिकार नहीं मिल रहा. सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब अपने तय हिस्से से अधिक पानी प्राप्त कर रहा है. वहीं दूसरी ओर निचले इलाकों में स्थित नहरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है. इससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है और राजनीतिक स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
राजनीतिक दलों के बीच बढ़ा टकराव
जल संकट ने पाकिस्तान की राजनीति को भी गर्मा दिया है. विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर विफलता के आरोप लगा रहे हैं. जमात-ए-इस्लामी ने सिंध सरकार को पानी प्रबंधन में नाकाम बताया है, जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का कहना है कि सिंध को उसके अधिकार का पानी नहीं दिया जा रहा. पीपीपी नेताओं का तर्क है कि सिंध पाकिस्तान के कृषि उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान देता है, फिर भी उसे पानी की आपूर्ति में प्राथमिकता नहीं मिल रही. उनका कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.
किसानों के सामने खड़ा हुआ अस्तित्व का संकट
ग्रामीण इलाकों में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं. कई किसानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण वे समय पर खेती शुरू नहीं कर पा रहे हैं. कुछ क्षेत्रों में नहरों में पानी इतना कम है कि खेतों तक सिंचाई पहुंचाना लगभग असंभव हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीफ सीजन प्रभावित होता है तो चावल, कपास और अन्य प्रमुख फसलों का उत्पादन कम हो सकता है. इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी बल्कि खाद्य सुरक्षा और निर्यात पर भी असर पड़ सकता है.
पाकिस्तान के लिए बड़ी रणनीतिक चुनौती
पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. ऐसे में जल संकट केवल एक मौसमी समस्या नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीतिक चुनौती बनता जा रहा है. बढ़ती आबादी, जल प्रबंधन की कमियां और प्रांतों के बीच संसाधनों को लेकर विवाद इस संकट को और जटिल बना रहे हैं. भारत के कड़े रुख और पाकिस्तान के अंदर बढ़ते जल विवादों के बीच आने वाले समय में इस मुद्दे का महत्व और बढ़ सकता है. फिलहाल सिंध और बलूचिस्तान के किसानों की निगाहें आसमान और सरकार दोनों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि पानी की हर बूंद अब उनके भविष्य से जुड़ चुकी है.
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