ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब खुद मुश्किल स्थिति में फंसता नजर आ रहा है. यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद इस्लामाबाद की चिंता बढ़ गई है.
पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब और ईरान दोनों ही अहम देश हैं. ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो पाकिस्तान पर किसी एक पक्ष का साथ देने का दबाव बन सकता है.
सऊदी के साथ रक्षा समझौता बना चुनौती
पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता किया था. इसके तहत पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती सऊदी अरब में की गई है.
अब डर है कि अगर सऊदी अरब और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो पाकिस्तान भी इसकी चपेट में आ सकता है. इससे इस्लामाबाद के लिए अपनी कूटनीतिक स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.
सऊदी पर हमला पाकिस्तान की रेड लाइन
एक पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारियों ने ईरान को साफ संदेश दिया है कि सऊदी अरब पर हमला पाकिस्तान के लिए गंभीर मामला होगा.
अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरानी नेतृत्व को बताया है कि सऊदी अरब की सुरक्षा उसके लिए बेहद अहम है और वहां किसी भी बड़े हमले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
हूती हमलों से बढ़ी पाकिस्तान की चिंता
पाकिस्तानी अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के हूती हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान को उम्मीद नहीं थी कि हालात इतनी तेजी से बिगड़ेंगे. अगर हूती संगठन सऊदी अरब के अंदर और हमले बढ़ाते हैं तो सीमा के पास तैनात पाकिस्तानी सैनिकों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है.
इसके अलावा, क्षेत्र में बढ़ते तनाव से लाल सागर के रास्ते होने वाले व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है.
अभी भी मध्यस्थता की कोशिश में पाकिस्तान
इन हालात के बावजूद पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश जारी रखना चाहता है.
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि तनाव बढ़ने के बावजूद वह दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीति का रास्ता खुला रखना चाहता है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. मंत्रालय का कहना है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस संकट का समाधान निकाला जा सकता है.
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