Taliban Attacks Pakistan: डूरंड रेखा पर तालिबान के बहु-आयामी हमलों से पाकिस्तान में खुफिया और सैन्य तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. हालिया घटनाएं रावलपिंडी में हाई कमान को हिलाकर रख देने वाली रही हैं.
हाल ही में अफगान तालिबान द्वारा डूरंड रेखा पर एक साथ कई मोर्चों से किए गए हमलों के बाद पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियां सकते में आ गई हैं. यह हमले इतने संगठित और तेज़ गति से हुए कि पाकिस्तानी सुरक्षाबल उन्हें रोकने के लिए तत्पर नहीं हो सके. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें सैन्य और खुफिया प्रतिष्ठान के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए.
जनरल मुनीर की आपात बैठक में सेना के वरिष्ठ नेतृत्व का जमावड़ा
GHQ रावलपिंडी में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. इनमें कोर कमांडर पेशावर, सदर्न कमांड के प्रमुख, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, मिलिट्री इंटेलिजेंस और मिलिट्री ऑपरेशंस विभागों के निदेशक शामिल थे. सबसे अहम उपस्थिति थी इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (ISI) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक की, जो सीधे तौर पर खुफिया नाकामी के लिए जवाबदेह माने जा रहे हैं.
इस बैठक में फील्ड मार्शल मुनीर ने बहुत स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों से यह जानना चाहा कि सीमा पार से आए इतने बड़े हमलों की पहले से जानकारी क्यों नहीं थी और सुरक्षा बल तत्काल प्रभावी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे सके.
डूरंड रेखा पर तालिबान के हमले
तालिबान ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा, जिसे डूरंड लाइन के नाम से जाना जाता है, पर एक साथ कई इलाकों से हमले किए. इन हमलों का केंद्र उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा और दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान के सीमाई इलाके थे. जानकारी के अनुसार, अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, चितराल, वजीरिस्तान और देर जैसे खैबर पख्तूनख्वा के क्षेत्र और बलूचिस्तान के चमन और बह्रम चाह में तालिबान ने पाकिस्तान की सीमा चौकियों को निशाना बनाया.
ये हमले इतनी रणनीतिक तरीके से किए गए कि पाकिस्तानी सेना की फ्रंटलाइन पोस्ट्स पूरी तरह से चौंक गईं. हमलों में सैकड़ों की संख्या में लड़ाके शामिल थे, जो पहले से तैयार और समन्वित प्रतीत हो रहे थे.
पाकिस्तान की खुफिया नाकामी पर फील्ड मार्शल की कड़ी प्रतिक्रिया
सेना प्रमुख ने बैठक में यह बात दोहराई कि पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक गहराई की कमी का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि देश अब "नरम राज्य" की तरह नहीं चल सकता और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से मजबूत करने की ज़रूरत है.
फील्ड मार्शल ने सेना के हर सेक्टर और यूनिट को सीमा पर सतर्कता बढ़ाने, नई निगरानी प्रणाली लागू करने और हर संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई करने के आदेश दिए. उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पश्चिमी सीमा पर सैन्य दबाव और बढ़ेगा.
ISI प्रमुख के नेतृत्व पर मंडराए सवाल
इस पूरी स्थिति के केंद्र में ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक आ गए हैं. खुफिया एजेंसी की नाकामी को लेकर जनरल मुनीर ने बैठक में कई तीखे सवाल किए. उन्होंने सीधा सवाल उठाया कि जब तालिबान इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा था, तो ISI को इसकी भनक क्यों नहीं लगी.
सूत्रों के अनुसार, यह भी पूछा गया कि क्या खुफिया नेटवर्क कमजोर हो गया है या फिर सूचना होने के बावजूद उसका सही विश्लेषण नहीं किया गया. यह भी सामने आया कि खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण समय रहते अलर्ट जारी नहीं किया गया.
सात दिनों में मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
फील्ड मार्शल मुनीर ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे आगामी सात दिनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें. इस रिपोर्ट में यह बताना अनिवार्य होगा कि किन-किन स्तरों पर चूक हुई, खुफिया सूचना कैसे नहीं मिली, और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.
यह रिपोर्ट सीधे तौर पर सेना प्रमुख को सौंपी जाएगी और इसके आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में गंभीर चूक साबित होती है, तो ISI के शीर्ष नेतृत्व में फेरबदल भी किया जा सकता है.
तालिबान के साथ रिश्तों में बढ़ेगा तनाव
इन घटनाओं का असर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ना तय है. पाकिस्तान लंबे समय तक तालिबान का समर्थनकर्ता रहा है, लेकिन अब वह स्वयं उसी संगठन के हमलों का सामना कर रहा है. इससे दोनों पक्षों के बीच भरोसे की दीवार और कमजोर हो सकती है.
तालिबान द्वारा इस तरह के समन्वित हमले पाकिस्तान के लिए यह संदेश हैं कि अब वह पश्चिमी सीमा को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं मान सकता. यह परिस्थिति पाकिस्तान की विदेश नीति के लिए भी एक चुनौती बनकर उभरी है.
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