जैश-ए-मोहम्मद के कैंप को फिर से बनाने की तैयारी में पाकिस्तान सरकार, ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था ध्वस्त

पाकिस्तान में एक बार फिर आतंकवादी संगठनों के प्रति नरमी और राजनीतिक संरक्षण के संकेत देखने को मिल रहे हैं.

Pakistan government preparing to rebuild Jaish-e-Mohammed camp
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान में एक बार फिर आतंकवादी संगठनों के प्रति नरमी और राजनीतिक संरक्षण के संकेत देखने को मिल रहे हैं. खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार अब नियंत्रण रेखा के पार (PoK) स्थित जैश-ए-मोहम्मद के ध्वस्त मरकज सैयदना बिलाल को दोबारा बनाने की योजना पर काम शुरू करने जा रही है.

यह वही प्रशिक्षण शिविर है जिसे भारत ने 7 मई को किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया था. इस हमले में जैश के कई शीर्ष आतंकी मारे गए थे और संगठन के कई प्रशिक्षण ठिकाने ध्वस्त हो गए थे.

पाकिस्तानी मंत्री का मुजफ्फराबाद दौरा

खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले सप्ताह पाकिस्तान के संघीय मंत्री राणा मोहम्मद कासिम नून, जो पाकिस्तान शासित कश्मीर मामलों के प्रभारी हैं, ने मुजफ्फराबाद की शवली रोड पर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के पुराने कैंप का दौरा किया.

उनके साथ स्थानीय अधिकारी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के कई नेता भी मौजूद थे. मंत्री ने मौके पर जाकर ध्वस्त इमारतों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से कैंप के पुनर्निर्माण की योजना और लागत की जानकारी ली.

दौरे के दौरान राणा नून ने सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया कि पाकिस्तानी सरकार जल्द ही इस मरकज का पुनर्निर्माण कार्य शुरू करेगी, ताकि “स्थानीय समुदाय” को सहायता मिल सके. हालाँकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह कथित “समुदाय केंद्र” असल में जैश का प्रशिक्षण शिविर था जहाँ आतंकियों को हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती थी.

भारत की स्ट्राइक से हिले थे आतंकी ठिकाने

भारत द्वारा 7 मई को किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के कई ठिकाने तबाह किए गए थे. इस कार्रवाई में कुल 9 आतंकी कैंप ध्वस्त हुए थे और करीब 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे.

मुजफ्फराबाद में स्थित मरकज सैयदना बिलाल भी इन्हीं लक्ष्यों में से एक था, जहां से आतंकियों को नियंत्रण रेखा पार भेजने की तैयारी की जाती थी. इस हमले में जैश के दो शीर्ष कमांडर हसन खान और वकास खान मारे गए थे. बाद में पाकिस्तानी मंत्री उनके परिजनों को मुआवजे के रूप में 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के चेक देने भी गए थे.

सरकारी संरक्षण का नया उदाहरण

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सरकार ने मारे गए आतंकियों के परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की थी और यह भी कहा था कि “ध्वस्त धार्मिक केंद्रों” का पुनर्निर्माण कराया जाएगा. अब इस कथन को जैश के कैंप को दोबारा बनाने की घोषणा के रूप में देखा जा रहा है.

इससे पहले, पाकिस्तान सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय मुरीदके में पुनर्निर्माण के लिए 4 करोड़ रुपये की सहायता दी थी. अब जैश-ए-मोहम्मद के लिए भी इसी तरह की मदद शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.

यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह साफ संकेत देता है कि पाकिस्तान अब भी अपने “स्ट्रेटेजिक एसेट्स” यानी आतंकी संगठनों को संरक्षित करने की नीति पर कायम है.

FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर पाकिस्तान

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार के इस खुले रवैये की एक बड़ी वजह FATF की हालिया बैठक है. अक्टूबर में हुई बैठक में, आतंकियों के लिए धन जुटाने और आतंक समर्थक गतिविधियों के पर्याप्त सबूतों के बावजूद, पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल नहीं किया गया.

इसके बाद पाकिस्तान सरकार अब पहले से अधिक बेखौफ दिखाई दे रही है. यह पहला मौका है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने सार्वजनिक रूप से ऐसे ध्वस्त आतंकी अड्डे का दौरा किया और उसके “पुनर्निर्माण” की बात की.

‘धार्मिक केंद्र’ हकीकत में आतंकी ट्रेनिंग हब

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार इस दौरे को एक “धार्मिक संस्था” का निरीक्षण बताकर प्रचारित कर रही है. इस दौरान पास के अल हादी पब्लिक स्कूल के बच्चों को बुलाया गया ताकि ऐसा लगे कि यह स्थान धार्मिक शिक्षा का केंद्र है.

लेकिन भारतीय एजेंसियों के पास मौजूद तस्वीरें और वीडियो इसके विपरीत कहानी बताते हैं. इन्हीं इमारतों में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हसन खान, वकास खान और रिहान हैदर की ट्रेनिंग हुई थी. तस्वीरों में वे एके-47 और स्नाइपर राइफल जैसे आधुनिक हथियारों के साथ अभ्यास करते दिखे थे.

इन सबूतों से यह स्पष्ट होता है कि यह मरकज वास्तव में आतंकी प्रशिक्षण केंद्र था, न कि कोई धार्मिक शिक्षण संस्थान.

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