पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों में इस समय हलचल मची हुई है. देश के रक्षा मंत्री और वरिष्ठ नेता ख्वाजा आसिफ इन दिनों न सिर्फ सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव से खफा हैं, बल्कि उन्होंने सरकार, अफसरशाही और अपनी ही पार्टी पीएमएल-एन के नेताओं पर सीधा हमला बोलकर सियासी भूचाल ला दिया है.
उनके हालिया बयानों से न सिर्फ विपक्ष बल्कि खुद सरकारी मंत्री और सहयोगी भी असहज नजर आ रहे हैं. ताजा मामला तब और तूल पकड़ गया जब रेल मंत्री हनीफ अब्बासी ने राष्ट्रीय असेंबली में ही ख्वाजा आसिफ से इस्तीफे की मांग कर डाली.
क्यों नाराज़ हैं ख्वाजा आसिफ?
ख्वाजा आसिफ, जो चार दशकों से अधिक समय तक पाकिस्तान की राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं, अब खुद को सत्ता के केंद्र से दूर होता हुआ महसूस कर रहे हैं. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की विदेश यात्राओं में कभी उनके साथ दिखने वाले ख्वाजा आज हाशिए पर चले गए हैं, और उनकी जगह अब सेना प्रमुख खुद मौजूद रहते हैं जो स्पष्ट संकेत है कि सेना का प्रभाव बढ़ रहा है और राजनीतिक नेतृत्व कमजोर पड़ रहा है.
तीन बयानों ने मचाया बवाल
1. बाढ़ और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर हमला
ख्वाजा आसिफ ने देश में आई बाढ़ के लिए सीधे-सीधे पाकिस्तानी सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ठेकेदारों और नेताओं की मिलीभगत से पहाड़ों पर अवैध निर्माण हुए हैं, जिससे जल निकासी की व्यवस्था चरमरा गई है. उन्होंने उन नेताओं की भी आलोचना की जो बाढ़ के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हैं, और साफ कहा कि "पानी रुकता नहीं है, हमारी व्यवस्था ही कमजोर है."
2. अफसरों की विदेश में संपत्ति पर गंभीर आरोप
दूसरे बयान में ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी अफसरशाही पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कई अधिकारी यहां से पैसा लूटकर विदेशों, खासकर पुर्तगाल में आलीशान घर बना रहे हैं. इस बयान पर खासा बवाल मचा और राष्ट्रीय असेंबली को जांच कमेटी गठित करनी पड़ी. आसिफ ने देश के पूरे प्रशासनिक ढांचे को “भ्रष्टाचार का संरक्षक” करार दिया.
3. मरियम नवाज और सूबाई सरकारों पर निशाना
तीसरे और सबसे चौंकाने वाले बयान में उन्होंने मरियम नवाज के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की क्षमता पर ही सवाल उठा दिए. बाढ़ पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “राज्य सरकारें काम करने में नाकाम हैं” और यहां तक कह दिया कि बाढ़ अल्लाह का इनाम है, जिसे “बाल्टी में भरकर रख लेना चाहिए.”इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक जबरदस्त आलोचना हुई.
पार्टी में दरार के संकेत?
इन बयानों से साफ है कि पीएमएल-एन में अंदरूनी खींचतान बढ़ रही है. ख्वाजा आसिफ जैसे वरिष्ठ नेता की नाराजगी यह दिखा रही है कि पार्टी के कुछ धड़े सेना के बढ़ते दखल और नवाज परिवार के वर्चस्व से असंतुष्ट हैं. खासकर जब शहबाज शरीफ के नेतृत्व में सत्ता का बड़ा हिस्सा अब सैन्य नेतृत्व के निर्देशों पर चल रहा है, तो कई पुराने नेता खुद को प्रासंगिकता के संकट में पा रहे हैं.
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