Pahalgam Terrorist Attack: जम्मू-कश्मीर की शांत और सुरम्य वादियों को एक बार फिर आतंक की साजिश ने लहूलुहान कर दिया है. मंगलवार को पहलगाम घाटी में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई और कई गंभीर रूप से घायल हुए. इस हमले की जिम्मेदारी उस आतंकवादी संगठन ने ली है, जो पहले भी कई बार घाटी में हिंसा फैलाने के लिए बदनाम रहा है. TRF यानी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट'.
कौन है इस खौफनाक हमले के पीछे?
इस हमले के मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया है TRF का डिप्टी कमांडर सैफुल्लाह खालिद, जिसे सैफुल्लाह कसूरी के नाम से भी जाना जाता है. इस खूंखार आतंकी का नाम भारत में पहले भी कई आतंकी साजिशों में आ चुका है और इसके रिश्ते सीधे लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद से जोड़े जाते हैं.
पाकिस्तान से खुला समर्थन
जानकारी के मुताबिक, सैफुल्लाह खालिद को पाकिस्तान का पूरा संरक्षण प्राप्त है. न केवल आतंकी नेटवर्क बल्कि पाकिस्तानी सेना के कुछ गुटों से भी इसके घनिष्ठ संबंध बताए जाते हैं. हाल ही में उसे पाकिस्तान के पंजाब स्थित कंगनपुर में एक कट्टरपंथी सभा में बुलाकर जिहादी भाषण दिलवाया गया था. माना जाता है कि वह युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने और भारत के खिलाफ भड़काने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
TRF क्या है और इसका असली मकसद?
TRF की शुरुआत 2019 में उस समय हुई थी जब भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया. यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही नया चेहरा है, जिसे FATF जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की नजरों से बचाने के लिए तैयार किया गया था. TRF सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी एजेंडे को फैलाता है और घाटी में टारगेट किलिंग जैसे हमलों को अंजाम देता है. TRF की हालिया हिट लिस्ट में भारतीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों से लेकर भाजपा नेताओं तक के नाम शामिल थे, जिससे इसकी घातक मंशा का अंदाजा लगाया जा सकता है.
यह साफ है कि सैफुल्लाह खालिद और TRF की ये साजिशें सिर्फ भारत के अमन-चैन पर ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर हमला हैं. अब सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसे तत्वों को हमेशा नजरअंदाज करता रहेगा, या आतंक के इस नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने में भारत का साथ देगा?
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