Online Scam: ऑनलाइन शॉपिंग ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है. अब मोबाइल पर कुछ टैप करते ही जरूरत का सामान घर तक पहुंच जाता है. लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं. हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों ने ऑनलाइन पेमेंट तो कर दिया, लेकिन या तो सामान कभी डिलीवर नहीं हुआ या फिर डिलीवरी के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसे ठग लिए गए. साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ई-कॉमर्स से जुड़े फ्रॉड पहले की तुलना में कहीं अधिक संगठित और तकनीकी हो चुके हैं, इसलिए ऑनलाइन खरीदारी करते समय अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है.
सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए बिछाया जा रहा जाल
आज इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापनों की भरमार है. इनमें महंगे प्रोडक्ट बेहद कम कीमत पर बेचने का दावा किया जाता है. इन ऑफर्स को देखकर कई लोग बिना जांच-पड़ताल किए ऑर्डर कर देते हैं. कई मामलों में भुगतान होने के बाद न तो सामान भेजा जाता है और न ही ग्राहक से कोई संपर्क किया जाता है. कुछ समय बाद वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज भी गायब हो जाता है, जिससे पीड़ित के पास शिकायत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.
एड्रेस वेरिफिकेशन के नाम पर हो रही नई ठगी
साइबर अपराधियों ने अब ठगी का एक नया तरीका भी अपनाया है. इसमें ग्राहक सोशल मीडिया पर दिख रहे किसी विज्ञापन के जरिए प्रोडक्ट ऑर्डर करता है. ऑर्डर के कुछ समय बाद उसके पास व्हाट्सऐप पर एक संदेश आता है, जिसमें दावा किया जाता है कि पार्सल भेजने से पहले एड्रेस वेरिफिकेशन के लिए 1,299 रुपये जमा करने होंगे और यह रकम बाद में वापस कर दी जाएगी.
विश्वास में आकर कई लोग यह भुगतान कर देते हैं, लेकिन इसके बाद न तो पैसा लौटता है और न ही कोई पार्सल पहुंचता है. कई मामलों में इसी तरह लोगों से हजारों ही नहीं, बल्कि लाखों रुपये तक की ठगी की जा चुकी है.
सस्ते ऑफर बन रहे हैं सबसे बड़ा लालच
साइबर ठगों की सबसे बड़ी ताकत लोगों की जल्दबाजी और सस्ते सामान पाने की इच्छा बन गई है. सोशल मीडिया रील्स और वायरल वीडियो में ऐसे ऑफर दिखाए जाते हैं, जो सामान्य बाजार कीमत से काफी कम होते हैं. यही देखकर लोग बिना वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचे लिंक पर क्लिक कर देते हैं या तुरंत भुगतान कर देते हैं. यही एक छोटी-सी गलती उन्हें बड़े आर्थिक नुकसान तक पहुंचा सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी आकर्षक ऑफर पर भरोसा करने से पहले वेबसाइट, विक्रेता और भुगतान के माध्यम की अच्छी तरह जांच जरूर करनी चाहिए.
अब पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं साइबर अपराधी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब ऑनलाइन ठगी सिर्फ फर्जी वेबसाइट या नकली पेमेंट लिंक तक सीमित नहीं रही. अपराधी ई-कॉमर्स सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर नए तरीके अपना रहे हैं. कुछ मामलों में डिलीवरी प्रक्रिया के दौरान ओटीपी का गलत इस्तेमाल किया जाता है, जबकि कहीं ग्राहकों की अकाउंट जानकारी बदलकर उनके ऑर्डर और भुगतान से छेड़छाड़ की जाती है.
तकनीक के साथ-साथ साइबर अपराधियों की रणनीतियां भी लगातार बदल रही हैं. ऐसे में केवल मजबूत पासवर्ड रखना ही काफी नहीं है, बल्कि हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के दौरान सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी हो गया है.
ऑनलाइन खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
ऑनलाइन शॉपिंग हमेशा भरोसेमंद और आधिकारिक वेबसाइट या वेरिफाइड मोबाइल ऐप के जरिए ही करनी चाहिए. सोशल मीडिया पर दिखने वाले अनजान लिंक या अत्यधिक सस्ते ऑफर्स पर तुरंत भरोसा करने से बचें. किसी भी अतिरिक्त भुगतान, एड्रेस वेरिफिकेशन फीस या रिफंड के नाम पर मांगे गए पैसे जमा करने से पहले उसकी पूरी जांच करें. यदि किसी तरह की धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म, बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.
ऑनलाइन ठगी से कैसे बचें?
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