भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम प्रगति हुई है. ओला इलेक्ट्रिक ने घोषणा की है कि उसने देश की पहली रेयर अर्थ मेटल्स (Rare Earth Metals) के बिना काम करने वाली फेराइट मोटर (Ferrite Motor) विकसित की है. यह मोटर अब भारत सरकार से आधिकारिक स्वीकृति (approval) भी प्राप्त कर चुकी है.
इस उपलब्धि को भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए एक बड़ी तकनीकी और रणनीतिक जीत माना जा रहा है, क्योंकि अब तक देश की ईवी मोटर तकनीक मुख्य रूप से चीन से आयातित दुर्लभ धातुओं पर निर्भर रही है.
रेयर अर्थ मेटल्स पर निर्भरता घटेगी
भारत में इलेक्ट्रिक मोटर्स के निर्माण के लिए अब तक जिन चुम्बकीय धातुओं का इस्तेमाल होता रहा है, उनमें प्रमुख रूप से नियोडिमियम (Neodymium), डिस्प्रोसियम (Dysprosium) और टरबियम (Terbium) जैसे रेयर अर्थ मटेरियल्स शामिल हैं. ये धातुएं मोटरों को अधिक एफिशिएंट, हल्का और कॉम्पैक्ट बनाती हैं.
चूंकि इन धातुओं की वैश्विक आपूर्ति पर चीन का लगभग 90% नियंत्रण है, इसलिए भारत सहित अन्य देशों की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला अकसर अस्थिर रहती है. चीन के एक्सपोर्ट प्रतिबंधों के चलते भारत में ईवी प्रोडक्शन पर कई बार असर पड़ा है.
ओला की नई फेराइट मोटर इस निर्भरता को समाप्त कर सकती है, क्योंकि इसमें रेयर अर्थ मेटल्स की बजाय फेराइट (Ferrite) का उपयोग किया गया है, जो सस्ता, आसानी से मिलने वाला और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तत्व है.
सरकारी प्रमाणन: GARC द्वारा परीक्षण
इस मोटर को तमिलनाडु स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) द्वारा AIS 041 मानकों के तहत सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है. ये मानक भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा निर्धारित किए गए हैं.
GARC की स्वीकृति का मतलब है कि यह मोटर तकनीकी रूप से प्रमाणिक, सुरक्षित और सार्वजनिक उपयोग के लिए उपयुक्त है. इससे ओला इलेक्ट्रिक को भारत में अपने इलेक्ट्रिक स्कूटरों में इन मोटरों के उपयोग का रास्ता मिल गया है.
फेराइट मोटर: प्रदर्शन और लागत दोनों में प्रभावी
ओला इलेक्ट्रिक ने इस मोटर को 7kW और 11kW की क्षमता में विकसित किया है. कंपनी के अनुसार, यह मोटर उन रेयर अर्थ मोटरों जितनी ही कार्यक्षमता और ताकत प्रदान करती है, लेकिन इसकी लागत कहीं कम है.
फेराइट मोटर की प्रमुख विशेषताएं:
ओला ने इस तकनीक को अगस्त 2025 में अपने ‘संकल्प 2025’ कार्यक्रम में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया था. अब इसका व्यावसायिक इस्तेमाल जल्द शुरू किया जा सकता है.
रेयर अर्थ मटेरियल्स के खनन में चीन का दबदबा
दुनिया भर में रेयर अर्थ मटेरियल्स के खनन का 70% और प्रोसेसिंग का 90% हिस्सा चीन के नियंत्रण में है. यह एकमात्र ऐसा देश है जो खनन के साथ-साथ परिष्करण (refining) और एक्सपोर्ट दोनों करता है.
हाल के वर्षों में, चीन और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव बढ़ने के कारण चीन ने कई बार रेयर मटेरियल्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं. इससे अमेरिका, जापान, भारत जैसे देशों को नई आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता महसूस हुई.
भारत की ओर से ओला जैसी कंपनियों द्वारा वैकल्पिक तकनीक विकसित करना, इसी रणनीतिक आवश्यकता का परिणाम है.
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