Punjab Blast Case: पंजाब में हाल ही में जालंधर और अमृतसर में हुए दो धमाकों के बाद जांच एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं. इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है, और अब मामले की गहराई से जांच की जा रही है.
जांच हुई तेज, NIA भी सक्रिय
इन धमाकों के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच सौंपी गई है. जैसे ही यह ऐलान हुआ, फोरेंसिक टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं. वहां से हर तरह के सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं, जैसे विस्फोटक के टुकड़े, मिट्टी के सैंपल और आसपास की चीजें.
इन सबूतों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि धमाके में किस तरह का IED इस्तेमाल किया गया था. जांच एजेंसियां किसी भी छोटी चीज को नजरअंदाज नहीं कर रही हैं, ताकि कोई अहम सुराग हाथ से न निकल जाए.
दोनों घटनाओं में दिखी समानता
शुरुआती जांच में एक अहम बात सामने आई है. जालंधर और अमृतसर दोनों जगह हुए धमाकों का तरीका और समय काफी हद तक एक जैसा है. इससे यह शक गहराया है कि दोनों घटनाओं के पीछे एक ही समूह या नेटवर्क हो सकता है.
जांच एजेंसियों को लग रहा है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है. अब इस बात की जांच की जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा.
खालिस्तानी एंगल की भी जांच
इस पूरे मामले में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को भी नजर में रखा जा रहा है. खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इन धमाकों के पीछे ऐसे किसी समूह का हाथ तो नहीं है. पिछले कुछ समय में पंजाब में इस तरह की गतिविधियों को लेकर अलर्ट बढ़ा है, इसलिए इस एंगल को भी गंभीरता से जांचा जा रहा है. एजेंसियां हर संभावित लिंक को जोड़ने में लगी हैं.
CCTV फुटेज से मिल रहे सुराग
इस केस में CCTV फुटेज काफी अहम साबित हो रहे हैं. अमृतसर धमाके का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें धमाके का पल साफ दिखाई दे रहा है. वहीं जालंधर में भी कुछ संदिग्ध लोगों की गतिविधियां कैमरे में रिकॉर्ड हुई हैं. इन फुटेज के आधार पर पुलिस संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश कर रही है. कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है, जिससे आगे और जानकारी मिलने की उम्मीद है.
डीजीपी गौरव यादव का आया बयान
इन घटनाओं के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने इन धमाकों को “ऑपरेशन सिंदूर” की बरसी से जोड़ते हुए इसे पाकिस्तान की साजिश बताया है.
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