शराब-मांस छोड़ेंगे तभी आएगी असली खुशहाली, नए साल पर फॉलो करें प्रेमानंद महाराज की ये बात

नए वर्ष की दस्तक के साथ ही आस्था के केंद्रों पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. कोई सुख-शांति की कामना लेकर पहुंच रहा है, तो कोई जीवन को नई दिशा देने के उपाय खोज रहा है.

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नए वर्ष की दस्तक के साथ ही आस्था के केंद्रों पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. कोई सुख-शांति की कामना लेकर पहुंच रहा है, तो कोई जीवन को नई दिशा देने के उपाय खोज रहा है. इसी क्रम में वृंदावन पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से नए साल को लेकर मार्गदर्शन मांगा. सवाल सीधा था.नए वर्ष में ऐसा क्या अपनाया जाए जिससे जीवन सचमुच बदल सके? महाराज का उत्तर उतना ही स्पष्ट था, जितना गहरा.

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि नया साल केवल जश्न, शोर-शराबे या पार्टियों तक सीमित नहीं होना चाहिए. यह आत्ममंथन का समय है. पुरानी गलतियों को छोड़कर सही राह पर कदम बढ़ाने का अवसर. उनके अनुसार, यदि व्यक्ति नए साल पर अपने आचरण को शुद्ध करने का संकल्प ले, तो वही असली शुरुआत है.

नशा, हिंसा और अनाचार से दूरी

महाराज ने साफ शब्दों में चेताया कि शराब, मांस, हिंसा और व्यभिचार जैसे कर्म मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग “हैप्पी न्यू ईयर” के नाम पर इन आदतों को अपनाते हैं, लेकिन इससे मिलने वाली खुशी क्षणिक होती है और अंततः दुख का कारण बनती है. उनके शब्दों में, यह आनंद नहीं, बल्कि पाप का निमंत्रण है.

नए वर्ष के लिए जरूरी संकल्प

प्रेमानंद महाराज ने नए साल के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी नियम बताए. उन्होंने कहा कि नशे का त्याग करें, मांसाहार से दूरी बनाएं, पराई स्त्री के प्रति गलत भावनाओं को मन में न आने दें. साथ ही क्रोध, चोरी और हिंसा जैसे दोषों से बचें. इसके बदले नाम-जप, ईश्वर भक्ति, सेवा और दान को जीवन का हिस्सा बनाएं. उनका मानना है कि ये संकल्प केवल एक साल नहीं, बल्कि पूरे जीवन को उज्ज्वल बना सकते हैं.

बच्चों और समाज के नाम संदेश

महाराज ने यह भी कहा कि अच्छे आचरण का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है. जो लोग बुरे कर्मों में लिप्त रहते हैं, वे स्वयं भी कष्ट पाते हैं और दूसरों के लिए भी गलत उदाहरण बनते हैं. उन्होंने दो टूक कहा—मनुष्य जीवन मिला है, तो मनुष्यता के अनुरूप कर्म करो, राक्षसी प्रवृत्तियों से दूर रहो.

सच्ची खुशी का स्रोत

अपने संदेश के अंत में प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट किया कि वास्तविक प्रसन्नता शराब, मांस या भोग-विलास से नहीं मिलती. सच्चा आनंद ईश्वर की भक्ति, अच्छे कर्म और परोपकार से उपजता है. उन्होंने सभी से अपील की कि नए साल पर ऐसे संकल्प लें जो आत्मा को शांति दें और जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाएं, ताकि पूरा वर्ष ही नहीं, पूरा जीवन मंगलमय बन सके.

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