सावधान! फिर आ गया कोरोना, अमेरिका समेत 22 देशों में फैल रहा नया वेरिएंट 'सिकाडा', जानिए लक्ष्ण

कोविड-19 महामारी के दौर में समय-समय पर नए वेरिएंट्स सामने आते रहे हैं, और अब एक और नया वेरिएंट, BA.3.2, चर्चा का विषय बन गया है. इस वेरिएंट को वैज्ञानिक ‘सिकाडा’ के नाम से पुकार रहे हैं.

New variant Cicada spreading in 22 countries including America
Image Source: Freepik

कोविड-19 महामारी के दौर में समय-समय पर नए वेरिएंट्स सामने आते रहे हैं, और अब एक और नया वेरिएंट, BA.3.2, चर्चा का विषय बन गया है. इस वेरिएंट को वैज्ञानिक ‘सिकाडा’ के नाम से पुकार रहे हैं. आइए जानते हैं इस नए वेरिएंट के बारे में विस्तार से और क्या हमें इससे सचमुच डरने की जरूरत है.

'सिकाडा' नाम क्यों पड़ा?

‘सिकाडा’ नाम इस वेरिएंट को एक कीड़े की तरह दिया गया है, जो वर्षों तक जमीन के नीचे छिपा रहता है और फिर अचानक बाहर आता है. दरअसल, BA.3.2 वेरिएंट ओमिक्रॉन के एक पुराने परिवार का हिस्सा है, जो लगभग दो साल पहले यानी 2022 की शुरुआत में समाप्त हो गया था. अब यह वेरिएंट अचानक से फिर से उभर आया है, इसी कारण इसे ‘सिकाडा’ नाम दिया गया है. यह नाम उस कीड़े के व्यवहार को दर्शाता है, जो लंबे समय तक भूमिगत रहने के बाद फिर अचानक बाहर आता है.

नया वेरिएंट कहां से आया?

BA.3.2 वेरिएंट ने अपनी पहली दस्तक दक्षिण अफ्रीका में 2024 के अंत में दी थी. हालांकि, इसके बाद यह वायरस कई देशों में तेजी से फैल रहा है, जिसमें अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. इसके फैलने की गति को देखते हुए इसे लेकर वैज्ञानिक और स्वास्थ्य अधिकारी अधिक सतर्क हो गए हैं.

सिकाडा वेरिएंट क्यों चिंता का विषय है?

वैज्ञानिक इस नए वेरिएंट को लेकर इसलिए चिंतित हैं, क्योंकि इसने अपने बाहरी हिस्से यानी स्पाइक प्रोटीन में बहुत बदलाव किए हैं. इस वेरिएंट में अपने पुराने रूप की तुलना में 50 से अधिक और ‘वुहान वायरस’ की तुलना में 70 से ज्यादा बदलाव देखे गए हैं. इसके कारण यह वेरिएंट कई कारणों से चिंताजनक बना हुआ है:

इम्यूनिटी को चकमा देना: यह नया वेरिएंट हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को चकमा देकर बच सकता है, जिससे वैक्सीनेशन के बावजूद संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है.

तेजी से फैलना: इस वेरिएंट की फैलने की गति पुराने वेरिएंट्स से कहीं अधिक है, जिससे इसके तेजी से प्रसार का डर बढ़ जाता है.

नया जैविक व्यवहार: वायरस के काम करने के तरीके में कुछ जैविक बदलाव हो सकते हैं, जिससे यह पहले से अधिक खतरनाक हो सकता है.

क्या हमें इससे डरने की जरूरत है?

अभी तक के अनुसंधान के आधार पर, हमें इससे घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि यह वेरिएंट तेजी से फैल सकता है, लेकिन अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि यह पुराने ओमिक्रॉन वेरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक या जानलेवा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दिसंबर 2025 में इसे “निगरानी के तहत वेरिएंट” (VUM) घोषित किया है, जो दर्शाता है कि इस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

ये भी पढ़ें: पाकिस्तान के बाद अब ईरान ने दिया चीन को झटका, IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट पर ड्रैगन के साथ किया बड़ा खेल