लखनऊ: उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक सीमाएं एक बार फिर बदलने की दिशा में हैं. योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य का 76वां जिला बनाने की तैयारी में है, जो भाजपा के दिग्गज नेता और दो बार मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह की स्मृति को समर्पित होगा. यह नया जिला ‘कल्याण सिंह नगर’ नाम से जाना जा सकता है, जिसका केंद्र होगा अलीगढ़ की अतरौली तहसील, यानी वही भूमि जहां कल्याण सिंह का जन्म हुआ था.
अलीगढ़ और बुलंदशहर से बनेगा नया जिला
प्रस्तावित जिले का गठन अलीगढ़ और बुलंदशहर के कुछ हिस्सों को जोड़कर किया जाएगा. इसमें अलीगढ़ की अतरौली और गंगीरी तहसीलें तथा बुलंदशहर की डिबाई तहसील शामिल होंगी. यह पूरा इलाका गंगा-यमुना दोआब में बसा है उपजाऊ भूमि, समृद्ध कृषि और दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी के कारण यहां विकास की अपार संभावनाएं हैं.
राजू भैया की पहल से शुरू हुई प्रक्रिया
कल्याण सिंह के पुत्र और पूर्व सांसद राजवीर सिंह (राजू भैया) ने 1 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपने पिता की जन्मभूमि मढ़ौली गांव (अतरौली) को केंद्र में रखकर नया जिला बनाने की औपचारिक मांग की थी. उनका तर्क था कि यह न केवल क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि एक लोकप्रिय नेता की विरासत को सहेजने का माध्यम भी बनेगा.
पहले भी उठ चुकी है मांग
इससे पहले दिसंबर 2024 में ‘जिला निर्माण संघर्ष समिति’ ने भी इसी तरह का प्रस्ताव दिया था, जिसमें अनूपशहर, डिबाई और शिकारपुर तहसीलों को मिलाकर नया जिला बनाने की सिफारिश की गई थी. उस समय भी यह मांग स्थानीय जनता के प्रशासनिक सुविधा, रोजगार और विकास से जुड़ी आकांक्षाओं को दर्शाती थी.
सरकारी स्तर पर तेजी से आगे बढ़ी प्रक्रिया
राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव (प्रभारी) राम कुमार द्विवेदी ने अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में अलीगढ़ और बुलंदशहर के जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है. पत्र में नए जिले के गठन से संबंधित जनसंख्या, क्षेत्रफल, प्रशासनिक औचित्य और विकास क्षमता पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. यह रिपोर्ट राजस्व परिषद के माध्यम से राज्य सरकार को भेजी जाएगी, जिसके बाद कैबिनेट स्तर पर प्रस्ताव अनुमोदन के लिए रखा जाएगा.
कल्याण सिंह: एक जननेता, एक प्रतीक
5 जनवरी 1932 को अलीगढ़ के मढ़ौली गांव में जन्मे कल्याण सिंह न सिर्फ एक जनप्रिय नेता थे, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के ऐसे चेहरा थे जिन्होंने विकास और हिन्दुत्व दोनों को समान महत्व दिया. वे 10 बार विधायक, दो बार मुख्यमंत्री, बुलंदशहर से सांसद और राजस्थान व हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे. 1992 के बाबरी मस्जिद प्रकरण में उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की थी. 2021 में निधन के बाद भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया.
स्थानीय विकास और राजनीतिक असर
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह जिला न केवल प्रशासनिक दृष्टि से लाभकारी होगा बल्कि क्षेत्र के लिए नई विकास परियोजनाओं, रोजगार और बुनियादी ढांचे के अवसर भी लाएगा. भाजपा समर्थकों के लिए यह कदम कल्याण सिंह की स्मृति को अमर करने वाला भावनात्मक निर्णय माना जा रहा है.
सोशल मीडिया पर समर्थन की लहर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर #KalyanSinghNagar और #NayeBharatKaNayaUP जैसे हैशटैग्स के साथ यह विषय खूब ट्रेंड कर रहा है. स्थानीय जनता और भाजपा कार्यकर्ता सरकार की इस पहल को “सम्मान और विकास का संगम” बता रहे हैं.
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