हिमस्खलन, भूकंप या बारिश... क्या है नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की असली वजह, जानें 3 बड़े कारण

Nepal Flood: नेपाल के रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी के अचानक उफान से भारी तबाही, सैकड़ों लोग लापता, बाढ़ की वजह को लेकर हिमस्खलन और भूकंप समेत कई संभावनाओं की जांच जारी.

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Nepal Flood: नेपाल में आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है. रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उफान ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे पुल बह गए, बस्तियां प्रभावित हुईं और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं. इस आपदा का असर नेपाल तक सीमित नहीं है. पड़ोसी देश भारत में भी खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि दोनों राज्यों की सीमाएं नेपाल से लगती हैं और वहां होने वाली भारी जल आपदा का असर इन क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है.

संभावित खतरे को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रशासन को अलर्ट किया गया है. राज्य सरकारें हालात पर नजर बनाए हुए हैं और राहत एवं बचाव के लिए NDRF की टीमों को भी तैयार रखा गया है. दूसरी ओर नेपाल में राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है. इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर इतनी अचानक और भीषण बाढ़ आई कैसे?

हिमस्खलन को माना जा रहा है बाढ़ की बड़ी वजह

शुरुआती जांच में हिमस्खलन को बाढ़ की संभावित वजह माना जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काठमांडू विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने आशंका जताई कि हिमस्खलन ल्हेन्डे नदी में गिरने के बाद नदी का प्रवाह बाधित हो गया होगा. इसके चलते पानी जमा हुआ और बाद में अचानक अवरोध हटने पर बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह गया. यही पानी भोटेकोशी नदी तक पहुंचा और इसके बाद आसपास के इलाकों में तबाही मच गई. हालांकि, अभी इस संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. विशेषज्ञ और प्रशासन बाढ़ के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्थिति का अध्ययन कर रहे हैं.

क्या भूकंप ने बढ़ाई तबाही?

बाढ़ की वजह के तौर पर भूकंप की संभावना को भी जांच के दायरे में रखा गया है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, तिब्बती क्षेत्र में सुबह करीब 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. इसका केंद्र गोसाईंकुंडा से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में बताया गया. काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के मुताबिक, भूकंप और संभावित हिमस्खलन का समय करीब-करीब एक ही था. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भूकंप ने हिमस्खलन को ट्रिगर किया और उसके बाद नदी में अचानक पानी का प्रवाह बढ़ गया. हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि भूकंप सीधे तौर पर बाढ़ की वजह बना.

भारी बारिश की वजह से नहीं आई बाढ़?

आम तौर पर अचानक आई बाढ़ के पीछे भारी बारिश को प्रमुख कारण माना जाता है, लेकिन रासुवा में इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है. नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मंगलवार या बुधवार को रासुवा क्षेत्र में भारी बारिश नहीं हुई थी. विभाग ने यह भी बताया कि बुधवार को इलाके में बारिश की संभावना नहीं थी और बारिश लाने वाले बादलों के बनने की संभावना गुरुवार से जताई गई थी. इसी वजह से वैज्ञानिकों ने फिलहाल भारी बारिश को बाढ़ की मुख्य वजह मानने से इनकार किया है. अब जांच का फोकस हिमस्खलन, नदी में अचानक बने अवरोध और भूकंपीय गतिविधियों के बीच संभावित संबंध पर है.

भोटेकोशी बाढ़ के बाद 384 यात्री लापता

भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे अचानक आई बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों और यात्रियों के लापता होने की खबर सामने आई है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, करीब 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए जा रहे हैं. लापता लोगों की शुरुआती सूची में 105 भारतीय नागरिकों और 37 NRI यात्रियों की पहचान भी की गई है. हालांकि, ये आंकड़े अभी प्रारंभिक हैं और अधिकारियों की ओर से इनकी पुष्टि की प्रक्रिया जारी है. ट्रैवल एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, गाइड और सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड का मिलान कर लापता यात्रियों की वास्तविक संख्या पता लगाने की कोशिश की जा रही है.

105 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक, पहचाने गए 105 भारतीय यात्रियों में 59 लोग सम्राट टूर एंड ट्रेवल्स के जरिए और 46 यात्री Leaf हॉलीडे के माध्यम से यात्रा कर रहे थे. इसके अलावा 37 NRI यात्रियों का रिकॉर्ड हिमालयन ग्लेशियर के दस्तावेजों में दर्ज होने की बात कही गई है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे अलग-अलग एजेंसियों के रिकॉर्ड की जांच पूरी होगी, लापता यात्रियों की संख्या में बदलाव हो सकता है. राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ प्रशासन यात्रियों की पहचान और उनके परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाने पर भी काम कर रहा है.

कई देशों के नागरिक भी लापता

लापता यात्रियों में भारत और नेपाल के अलावा कई अन्य देशों के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं. Fishtail टूर एंड ट्रेवल्स की ओर से 20 विदेशी यात्रियों की जानकारी दी गई है, जिनमें तीन अमेरिकी और 17 मलेशियाई नागरिक शामिल हैं. वहीं, हिमालयन ग्लेशियर के रिकॉर्ड में 37 विदेशी यात्रियों का उल्लेख है. अल्पाइन इको ट्रेक से जुड़े 16 यात्रियों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 12 ब्रिटेन और चार दक्षिण अफ्रीका के नागरिक बताए जा रहे हैं. कुछ अन्य विदेशी यात्रियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि अभी बाकी है.

EU ने एक्टिवेट किया सैटेलाइट सर्विलांस सिस्टम

नेपाल में बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए यूरोपीय संघ ने भी मदद के लिए कदम बढ़ाया है. EU ने अपने Copernicus सैटेलाइट सिस्टम को सक्रिय कर दिया है. इसके जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सैटेलाइट तस्वीरें और मैपिंग तैयार की जाएगी, जिससे जमीन पर राहत और बचाव अभियान चलाने वाली एजेंसियों को जरूरी जानकारी मिल सके.

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को बताया कि नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाकों की मैपिंग के लिए सैटेलाइट सिस्टम को एक्टिवेट किया गया है. इसका इस्तेमाल प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने, नुकसान की तस्वीर समझने और रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहतर तरीके से संचालित करने में किया जा सकता है.

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव कार्य जारी है. बाढ़ के वास्तविक कारण का पता लगाने के साथ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना है. वहीं, भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में भी अधिकारी नेपाल के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी संभावित जल संकट से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें.

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