नेपाल में विनाशकारी बाढ़ की तबाही से उबरने की कोशिशों के बीच मंगलवार रात धरती भी कांप उठी. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, नेपाल में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसके झटके राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में महसूस किए गए. यह भूकंप उस विनाशकारी बाढ़ के करीब दो हफ्ते बाद आया है, जिसमें 1,300 से ज्यादा लोगों की जान जाने और हजारों लोगों के लापता होने की खबर है.
चीन-नेपाल सीमा बनी भूकंप का केंद्र
नेशनल सर्वे ऑफ साइंसेज के अनुसार, भूकंप का केंद्र चीन-नेपाल सीमा के पास था और यह जमीन के करीब 143 किलोमीटर नीचे आया. यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र के मुताबिक, इससे कुछ घंटे पहले तिब्बत में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र करीब 35 किलोमीटर की गहराई में था. लगातार भूकंपीय गतिविधियों के बीच नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में लोगों की चिंता बढ़ गई है.
बाढ़ के बाद अब भूकंप ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में आया यह झटका ऐसे समय पर महसूस किया गया है, जब देश अभी हालिया बाढ़ से हुए भारी नुकसान से जूझ रहा है. तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी की बाढ़ ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया था. सीमा के तिब्बती हिस्से में ग्यिरोंग बंदरगाह के पास भी भूस्खलन हुआ था. हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया था कि यह बाढ़ भूकंप के कारण नहीं, बल्कि हिमस्खलन और मलबे के बहाव से आई थी.
बचाव अभियान जारी, हजारों लोग अब भी लापता
बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 13 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया गया है. वहीं, चीनी मीडिया रिपोर्ट्स में तिब्बत में 500 से अधिक लोगों के लापता होने और चीन में कम से कम 43 मौतों का दावा किया गया है. ऐसे में ताजा भूकंप ने पहले से प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे नेपाल के सामने नई चिंता खड़ी कर दी है.