'अगर रूसी जेट आया तो उड़ा देंगे', फिर मत कहना...पुतिन को नाटो ने दी चेतावनी

यूरोप और रूस के बीच रिश्तों में तल्ख़ी अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. सीमा पर बढ़ते हवाई उल्लंघनों के बीच NATO देशों ने अब रूसी विमानों और मिसाइलों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है.

Nato Warns to putin of russia fighter jet came again will blast
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यूरोप और रूस के बीच रिश्तों में तल्ख़ी अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. सीमा पर बढ़ते हवाई उल्लंघनों के बीच NATO देशों ने अब रूसी विमानों और मिसाइलों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक में NATO सदस्यों ने साफ कर दिया कि अगर रूस ने फिर उनकी वायु सीमा का उल्लंघन किया, तो बिना किसी चेतावनी के जवाब दिया जाएगा.

पोलैंड का स्पष्ट संदेश: "हम चेतावनी नहीं देंगे, कार्रवाई करेंगे" बैठक में पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लॉव सिकोर्स्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा, अगर कोई रूसी विमान या मिसाइल हमारी हवाई सीमा में प्रवेश करता है और उसे मार गिरा दिया जाता है, तो रूस को शिकायत करने का कोई हक नहीं होगा.  इससे पहले प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी सार्वजनिक मंच पर यही चेतावनी दी थी कि अब कोई समझौता नहीं होगा — घुसपैठ का मतलब है सीधी कार्रवाई.

रूस के हवाई घुसपैठ से पड़ोसी देश सतर्क

पिछले कुछ हफ्तों में रूस पर एस्टोनिया, पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों की हवाई सीमाओं का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं. एस्टोनिया का दावा है कि रूस के तीन MiG-31 लड़ाकू विमान उसकी सीमा में 12 मिनट तक मंडराते रहे. पोलैंड के अनुसार, इसी महीने 20 रूसी ड्रोन उसकी सीमा में घुसे, जिन्हें जवाबी कार्रवाई में गिरा दिया गया. रोमानिया ने भी ऐसे ही हवाई अतिक्रमण की शिकायत की है.

डेनमार्क और ब्रिटेन की कड़ी प्रतिक्रिया

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने रूस पर सीधा आरोप लगाया कि वह पूर्वी यूरोप में अपनी "मर्जी की दादागिरी" दिखा रहा है. वहीं ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इन घटनाओं को “गंभीर सुरक्षा खतरा” बताया और कहा, यह गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है, जिसे NATO अब नजरअंदाज नहीं करेगा.

रूस का इनकार और पुतिन की चेतावनी

रूसी सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इन्हें बिना किसी ठोस सबूत के उछाला जा रहा है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दावा किया कि यह सब राजनीतिक प्रोपेगेंडा है, जिससे जानबूझकर तनाव बढ़ाया जा रहा है. लेकिन एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस साखना ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके पास पक्के सबूत हैं और रूसी जेट्स पूरी तरह हथियारों से लैस थे. इस बीच मॉस्को से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बयान जारी कर कहा कि रूस हथियारों की होड़ नहीं चाहता, लेकिन अगर हमारी सुरक्षा को चुनौती दी गई, तो हम शांत नहीं बैठेंगे. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि NATO का हर सदस्य देश सुरक्षित रहेगा. उन्होंने कहा,रूस को अपनी इन गतिविधियों पर तुरंत लगाम लगानी चाहिए, वरना अंजाम गंभीर होंगे.

क्या कूटनीति बचा पाएगी हालात को?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए सवाल यही है क्या रूस और पश्चिमी देशों के बीच कोई कूटनीतिक पुल बन पाएगा, या मामला सीधे संघर्ष की ओर बढ़ेगा? जहां एक ओर पश्चिमी देश सुरक्षा के नाम पर आक्रामक रुख अपना रहे हैं, वहीं रूस इसे उकसावे की कार्रवाई मान रहा है. अब देखना ये है कि आने वाले हफ्तों में हालात किस दिशा में मुड़ते हैं.

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