NATO On Putin: रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल बीत जाने के बाद भी जब जमीनी हालात नहीं बदले हैं, तब लिथुआनिया की रक्षा मंत्री डोविले सकालिने का बयान एक बार फिर वैश्विक चिंता को उजागर करता है. वाशिंगटन दौरे पर उन्होंने पेंटागन अधिकारियों से बातचीत के दौरान स्पष्ट कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शांति नहीं, बल्कि विनाश के एजेंडे पर काम कर रहे हैं.
डोविले सकालिने के मुताबिक, यूक्रेन पर रूसी हमले लगातार जारी हैं, और यह इस बात का संकेत है कि पुतिन की मंशा शांति वार्ता की नहीं, बल्कि यूक्रेन को घुटनों पर लाने की है. उन्होंने कहा कि पुतिन के बयानों और उनके सैन्य रवैये में कोई मेल नहीं है.
ट्रंप-पुतिन मुलाकात पर भी उठे सवाल
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन के बीच अलास्का में हुई बैठक से दुनिया को उम्मीद थी कि शायद यह युद्धविराम की दिशा में कोई पहल हो सकती है. दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की और पहले भी कई बार फोन पर बातचीत कर चुके हैं. ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि वे इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं.
लेकिन डोविले सकालिने का कहना है कि पुतिन इन कोशिशों को गंभीरता से नहीं ले रहे. वे बातचीत का दिखावा कर रहे हैं, जबकि जमीन पर उनके सैनिक आम नागरिकों पर हमले कर रहे हैं.
नाटो देशों की बढ़ती चिंता
नाटो सदस्य देशों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि पुतिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. सकालिने ने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब यूरोपीय नेता रूस की कथनी और करनी में फर्क देख रहे हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक रूस अपने सैन्य रवैये में बदलाव नहीं लाता, तब तक किसी भी शांति वार्ता का कोई मतलब नहीं निकलता.
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