इलाहबाद हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज, टूटेगी संभल की गौसुलवरा मस्जिद! जानें क्या हुआ फैसला?

जिला संभल की गौसुलवरा मस्जिद को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई अब और नज़दीक आ गई है.

Muslim side petition rejected in Allahabad High Court
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

संभल (उत्तर प्रदेश): जिला संभल की गौसुलवरा मस्जिद को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई अब और नज़दीक आ गई है. मस्जिद कमिटी की ओर से ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है. अदालत ने मस्जिद पक्ष को यह सलाह दी है कि पहले ट्रायल कोर्ट में अपील दायर करें. इस प्रकार, मस्जिद के खिलाफ जारी कार्रवाई पर फिलहाल अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है.

पृष्ठभूमि और याचिका की मांग

गौसुलवरा मस्जिद कमिटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन द्वारा मस्जिद, उसके संग जुड़े बारात घर और अस्पताल को ध्वस्त करने के लिए जारी आदेश अवैध हैं और उन्हें तुरंत स्थगित किया जाना चाहिए. मस्जिद कमिटी का यह भी दावा था कि ध्वस्तीकरण कार्य शुरू होने से पहले उन्हें सुनने का अवसर तक नहीं मिला.

मस्जिद कमिटी ने कहा कि वे मस्जिद एवं उससे जुड़े भवनों की संपत्ति संबंधी सभी दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं. उनका आरोप था कि प्रशासन बिना उचित प्रक्रिया और न्यायिक आदेश के ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरु कर चुका है.

प्रशासन का तर्क है कि मस्जिद और अन्य संरचनाएं तालाब की जमीन पर अवैध रूप से स्थापित की गई थीं, और इसलिए उनका ध्वस्तीकरण न्यायोचित माना जाना चाहिए.

हाईकोर्ट की सुनवाई और निर्णय

हाईकोर्ट की अदालती बेंच (न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल बेंच) ने शुक्रवार को सुबह 10 बजे याचिका की सुनवाई की. याची (मस्जिद कमिटी) की ओर से अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्री त्रिपाठी ने तर्क दिए कि ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए जाने से पहले उन्हें अनुमति नहीं दी गई और प्रक्रिया पूरी नहीं की गई.

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कहा कि फिलहाल ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा. अदालत ने यह निर्देश दिया कि मस्जिद कमिटी को पहले ट्रायल कोर्ट में अपील दाखिल करनी चाहिए. इस प्रकार हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया.

विवादित बिंदु और आरोप-प्रत्यारोप

इस विवाद के दौरान कुछ मुख्य बिंदु और आरोप सामने आए हैं:

बारात घर और अस्पताल की ध्वस्तीकरण कार्रवाई: याचिका में यह दावा किया गया है कि सिर्फ मस्जिद ही नहीं, बल्कि जुड़े हुए बारात घर और अस्पताल के ध्वस्तीकरण आदेश पर भी रोक लगाई जानी चाहिए.

प्रशासकीय कार्रवाई का समय: याची ने बताया कि ध्वस्तीकरण के लिए दिनांक 2 अक्टूबर, जिसमें गांधी जयंती और दशहरे भी शामिल हैं, को चुना गया था.

भीड़ और सुरक्षा: आरोप है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान बड़ी भीड़ जमा हो गई थी, जिससे हाथापाई या बड़े हादसे की आशंका बनी रही.

भूमि का स्वरूप: प्रशासन का कहना है कि मस्जिद का कुछ हिस्सा सरकारी (तालाब की) जमीन पर और कुछ हिस्से पर अवैध कब्जा है. जबकि मस्जिद पक्ष का दावा है कि अधिकांश जमीन उनके स्वामित्व में है, और उन्हें रिकॉर्ड दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं.

स्वयं कार्रवाई: याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि मस्जिद कमिटी ने खुद अपनी अपमानित हिस्सों को तोड़ने की कोशिश की है, संभवतः ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले खुद ही अवैध हिस्सों को समेटने के लिए.

कौन हैं अभिभाग और पक्षकार?

याचिका में राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), संभल एसपी, एडीएम, तहसीलदार और ग्राम सभा को पक्षकार बनाया गया. राज्य सरकार की ओर से चीफ स्टैंडिंग काउंसिल जे एन मौर्या और स्टैंडिंग काउंसिल आशीष मोहन श्रीवास्तव ने अदालत में पक्ष रखा.

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