दशकों की सेवा के बाद अब इतिहास बनेंगे मिग-21 लड़ाकू विमान, भारतीय वायुसेना इस तरह करेगी विदाई

भारतीय वायुसेना के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले फाइटर जेट मिग-21 अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहे हैं.

MiG-21 fighter jets to be retired after decades of service
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली/चंडीगढ़: भारतीय वायुसेना के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले फाइटर जेट मिग-21 अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहे हैं. छह दशकों तक भारतीय आसमान की रक्षा करने वाले इस लड़ाकू विमान को 26 सितंबर को एक औपचारिक समारोह के माध्यम से अंतिम विदाई दी जाएगी. चंडीगढ़ में आयोजित इस सेरेमनी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत वायुसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व फाइटर पायलट शामिल होंगे.

यह दिन केवल एक स्क्वॉड्रन की विदाई नहीं, बल्कि भारतीय सैन्य विमानन इतिहास के एक युग का अंत होगा.

क्या है मिग-21 की विदाई का कार्यक्रम?

सेरेमनी में भारतीय वायुसेना की दो स्क्वॉड्रन- स्क्वॉड्रन नंबर 23 (पैंथर्स) और स्क्वॉड्रन नंबर 3 (कोबरा) में से एक, पैंथर्स, को औपचारिक रूप से ‘नंबर प्लेटेड’ किया जाएगा, यानी उसे अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया जाएगा.

सेरेमनी के दौरान छह मिग-21 विमान एक विशेष फॉर्मेशन फ्लाईपास्ट करेंगे. यह एक भावनात्मक पल होगा जब ये लड़ाकू विमान अंतिम बार आकाश में गरजेंगे. उड़ान के बाद ये विमान मंच के सामने उतरेंगे और उन्हें स्विच ऑफ किया जाएगा, जो इस ऐतिहासिक यान की सक्रिय सेवा का अंतिम संकेत होगा.

फॉर्म-700 की अहमियत

मिग-21 के अंतिम संचालन के बाद, स्क्वॉड्रन के कमांडिंग ऑफिसर भारतीय वायुसेना प्रमुख को फॉर्म-700 की किताब सौंपेंगे. फॉर्म-700 वह दस्तावेज होता है जिसमें किसी भी विमान की हर उड़ान से पहले और बाद की तकनीकी जांच का पूरा विवरण दर्ज होता है. इसमें मशीन के हर हिस्से की जांच की पुष्टि की जाती है, इंजीनियरिंग स्टाफ और पायलट द्वारा साइन किया जाता है.

इस दस्तावेज का सौंपा जाना न केवल एक औपचारिकता है, बल्कि यह उस भरोसे का प्रतीक है जो वर्षों तक इस विमान ने अपनी टीम को दिया.

तेजस: नई पीढ़ी की तरफ प्रस्थान

जैसे ही मिग-21 अपनी अंतिम उड़ान भरेंगे, उन्हें हवा में एलसीए तेजस (LCA Tejas) एस्कॉर्ट करेगा. यह न केवल सम्मान की उड़ान होगी, बल्कि एक संक्रमण का प्रतीक भी कि अब वायुसेना की रक्षा की जिम्मेदारी भारत में विकसित हल्के लड़ाकू विमान तेजस के हाथों में सौंप दी जाएगी.

तेजस की उपस्थिति मिग-21 के युग के अंत और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम की घोषणा है.

पैंथर्स स्क्वॉड्रन की नंबर प्लेटिंग

स्क्वॉड्रन नंबर 23- पैंथर्स को इस समारोह के साथ अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिया जाएगा, जिसे वायुसेना की भाषा में “नंबर प्लेटिंग” कहते हैं. इसका अर्थ है कि स्क्वॉड्रन फिलहाल नए फाइटर जेट्स की प्रतीक्षा में सेवा से बाहर हो जाएगी, लेकिन उसका नाम, इतिहास और पहचान सुरक्षित रखी जाएगी.

जब भविष्य में नए विमानों की उपलब्धता होगी, तो पैंथर्स स्क्वॉड्रन को उसी नाम, परंपरा और गौरव के साथ दोबारा सक्रिय किया जाएगा.

इस प्रक्रिया के दौरान, स्क्वॉड्रन की सभी मैनपावर, संसाधन और उपकरणों को अन्य सक्रिय स्क्वॉड्रनों में समाहित कर दिया जाएगा.

कोबरा स्क्वॉड्रन का भविष्य

वहीं दूसरी स्क्वॉड्रन, नंबर 3 – कोबरा, को निष्क्रिय नहीं किया जाएगा. यह स्क्वॉड्रन जल्द ही भारतीय वायुसेना को मिलने वाले LCA मार्क-1A विमानों के साथ अपनी सेवाएं जारी रखेगी. यानी कोबरा स्क्वॉड्रन भविष्य की वायुसेना में भी अपना अहम योगदान देती रहेगी.

मेमोरी लेन: मिग-21 की विरासत को सम्मान

चंडीगढ़ में आयोजित होने वाले इस विदाई समारोह में मिग-21 की गौरवगाथा को संजोने के लिए एक “मेमोरी लेन” भी तैयार की जाएगी. इस प्रदर्शनी में मिग-21 के विकास, संचालन, अभियानों, और उनसे जुड़े ऐतिहासिक क्षणों की झलकियां दी जाएंगी.

यह न केवल सैनिकों और अधिकारियों के लिए, बल्कि आम नागरिकों और अगली पीढ़ी के पायलटों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनेगा.

मिग-21: एक झलक इतिहास पर

  • सेवा में शामिल: 1963 में
  • मूल देश: रूस (सोवियत संघ), लाइसेंस के तहत भारत में HAL द्वारा निर्मित
  • पहला सुपरसोनिक फाइटर जेट भारतीय वायुसेना में
  • कई युद्धों में सहभागिता: 1971, 1999 कारगिल युद्ध, बालाकोट एयरस्ट्राइक
  • भारत की वायु शक्ति को मजबूती देने में प्रमुख भूमिका

मिग-21 न केवल भारत का पहला सुपरसोनिक फाइटर रहा, बल्कि उसने भारतीय वायुसेना को वह धार दी जिसकी वजह से भारत ने कई लड़ाइयों में हवाई वर्चस्व कायम किया. हालांकि, आधुनिक युग में इसकी सुरक्षा सीमाएं इसे अब बदलने के लिए बाध्य कर चुकी हैं.

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