Microsoft Alert: आज के दौर में इंटरनेट के बिना कुछ घंटे बिताना भी कई लोगों के लिए मुश्किल हो गया है. यही वजह है कि होटल, एयरपोर्ट, कैफे या कॉन्फ्रेंस सेंटर पहुंचते ही लोग वहां उपलब्ध फ्री Wi-Fi से अपने फोन या लैपटॉप को कनेक्ट कर लेते हैं. लेकिन सुविधा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला यही नेटवर्क अब साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार बनता जा रहा है. Microsoft ने होटल और कॉन्फ्रेंस सेंटर के Wi-Fi नेटवर्क को लेकर यूजर्स को गंभीर चेतावनी जारी की है. कंपनी ने एक साइबर अटैक कैंपेन का पता लगाया है, जिसमें नकली लॉगिन पेज और फर्जी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यूजर्स को निशाना बनाया जा रहा है.
CaptiveCrunch के जरिए Wi-Fi सिस्टम पर हमला
Microsoft ने 31 जुलाई को जारी अपनी रिपोर्ट में CaptiveCrunch नाम के साइबर अटैक कैंपेन का खुलासा किया. कंपनी के मुताबिक हमलावर होटल और कॉन्फ्रेंस सेंटर के Wi-Fi नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले साइन-इन सिस्टम को निशाना बना रहे हैं. जब कोई व्यक्ति इस नेटवर्क से जुड़ता है तो उसके सामने सामान्य लॉगिन पेज की तरह दिखने वाला पेज खुलता है. इसी दौरान साइबर अपराधी यूजर को फर्जी सॉफ्टवेयर अपडेट डाउनलोड करने या किसी नकली लॉगिन पेज पर अपनी जानकारी दर्ज करने के लिए उकसा सकते हैं. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पूरा इंटरफेस देखने में काफी सामान्य और भरोसेमंद लग सकता है.
असली जैसा दिखने वाला Microsoft Login भी खतरनाक
होटल Wi-Fi से कनेक्ट होने के बाद दिखाई देने वाले पेज को आमतौर पर Captive Portal कहा जाता है. इसमें यूजर से नियम और शर्तों को स्वीकार करने के बाद इंटरनेट इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाती है. Microsoft के अनुसार साइबर अपराधियों ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाना शुरू कर दिया है. कुछ मामलों में हमलावर DNS और HTTP ट्रैफिक में भी बदलाव कर सकते हैं, जिससे यूजर जिस वेबसाइट तक पहुंचना चाहता है, उसे किसी दूसरे पेज पर भेजा जा सकता है. इसके अलावा फर्जी Microsoft Login पेज के जरिए यूजर की लॉगिन जानकारी और सेशन हासिल करने की कोशिश भी की जा रही है.
Device Code Authentication का भी हो रहा गलत इस्तेमाल
Microsoft ने 16 जुलाई के बाद ऐसे कई फर्जी पेज भी देखे हैं जो यूजर्स को Device Code Authentication की प्रक्रिया की तरफ ले जाते हैं. यह Microsoft का वैध लॉगिन फीचर है, लेकिन साइबर अपराधी इसे phishing के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. इस तरीके में सबसे खतरनाक बात यह है कि यूजर जिस Microsoft वेबसाइट पर कोड दर्ज करता है, वह वास्तव में असली वेबसाइट हो सकती है. लेकिन उस वेबसाइट पर इस्तेमाल किया जाने वाला कोड हमलावर की तरफ से पहले ही तैयार किया गया होता है. यही वजह है कि यूजर को अक्सर अंदाजा भी नहीं हो पाता कि वह साइबर हमले का शिकार बन रहा है.
AI की मदद से और खतरनाक हो रहे साइबर ऑपरेशन
Microsoft के मुताबिक Storm-2945 नाम का ग्रुप फरवरी से अपने साइबर ऑपरेशंस में AI का इस्तेमाल कर रहा है. इसमें Device Code और OAuth आधारित phishing जैसे तरीकों का इस्तेमाल शामिल है. कंपनी ने बताया कि इस समूह की गतिविधियों के एक महत्वपूर्ण हिस्से में AI की भूमिका देखी गई है. हालांकि Microsoft ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि हमलावरों ने किस AI सिस्टम का इस्तेमाल किया या किन प्रक्रियाओं को AI की मदद से ऑटोमेट किया गया. इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक तकनीकों के साथ नई तकनीक को भी जोड़कर हमलों को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
Malware इंस्टॉल होते ही निजी डेटा पर मंडरा सकता है खतरा
अगर कोई यूजर फर्जी अपडेट या हमलावरों की ओर से दिए गए किसी सॉफ्टवेयर या कमांड को चला देता है तो उसके डिवाइस पर खतरनाक Malware पहुंच सकता है. इसके बाद हमलावर कीबोर्ड पर टाइप की जाने वाली जानकारी रिकॉर्ड करने, स्क्रीनशॉट लेने और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड करने जैसी गतिविधियां कर सकते हैं. इसके अलावा ब्राउजर Cookies, सेव किए गए पासवर्ड और USB डिवाइस की गतिविधियों तक पर नजर रखी जा सकती है. PowerShell या Command Prompt के जरिए रिमोट कमांड चलाने और इंटरनेट ट्रैफिक को हमलावर के नियंत्रण वाले Proxy से गुजारने की कोशिश भी की जा सकती है. यानी खतरा केवल एक डिवाइस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़े अकाउंट और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच सकता है.
Android यूजर्स भी रहें अलर्ट
इस साइबर खतरे का असर केवल Windows डिवाइस तक सीमित नहीं है. Android यूजर्स को भी सावधान रहने की जरूरत है. Microsoft के अनुसार कुछ ClickFix पेज Android यूजर्स को बाहरी स्रोत से APK फाइल डाउनलोड कर उसे इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित करते हैं. हालांकि कंपनी का कहना है कि Android को निशाना बनाने वाले टूल फिलहाल Windows वाले हिस्से की तुलना में कम सक्रिय हैं. इसके बावजूद किसी अनजान वेबसाइट या होटल Wi-Fi के लॉगिन पेज से APK या किसी दूसरे ऐप को डाउनलोड करना जोखिम भरा हो सकता है.
होटल Wi-Fi इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानी
होटल में इंटरनेट इस्तेमाल करते समय सबसे सुरक्षित विकल्प संभव हो तो अपना मोबाइल हॉटस्पॉट इस्तेमाल करना है. इससे होटल के सार्वजनिक Wi-Fi नेटवर्क से जुड़े संभावित हमलावरों का जोखिम कम किया जा सकता है. अगर Guest Wi-Fi इस्तेमाल करना जरूरी हो तो VPN का इस्तेमाल एक अतिरिक्त सुरक्षा परत दे सकता है. इसके साथ ही Wi-Fi के Captive Portal पर दिखाई देने वाले किसी अनजान Software Update, APK, ऐप या कमांड को डाउनलोड और इंस्टॉल करने से बचना चाहिए. याद रखें, साइबर अपराधी अक्सर यूजर की जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाते हैं. इसलिए होटल का फ्री Wi-Fi इस्तेमाल करते समय सुविधा से ज्यादा अपनी डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है.
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