दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी शिकार बन चुकी यमुना नदी को फिर से जीवन देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. लंबे समय से गंदगी, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के बोझ तले कराह रही यमुना की हालत सुधारने के लिए अब एक व्यापक और तकनीकी रूप से मजबूत योजना तैयार कर ली गई है. दिल्ली सरकार ने जानकारी दी है कि यमुना को साफ करने के लिए करीब 518.88 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना शुरू की जा रही है, जिसका लक्ष्य अगले डेढ़ साल में नदी की सूरत बदलना है.
इस योजना के तहत सिर्फ नदी की सफाई ही नहीं होगी, बल्कि गंदे पानी को आधुनिक तकनीक से ट्रीट कर दोबारा यमुना में छोड़ा जाएगा, ताकि नदी में पानी का स्तर बना रहे और उसका प्राकृतिक प्रवाह सुधरे.
एलिवेटेड चैनल से पहुंचेगा साफ पानी
दिल्ली सरकार के मुताबिक यमुना सफाई योजना में पैरेलल वाटर सिस्टम, अत्याधुनिक पंपिंग स्टेशन और ऊंचे (एलिवेटेड) चैनल तैयार किए जाएंगे. इसका मकसद कोरोनेशन पिलर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में पूरी तरह साफ किए गए पानी को दोबारा यमुना नदी तक पहुंचाना है.
योजना के अनुसार जहांगीरपुरी नाले से प्रतिदिन करीब 30 मिलियन गैलन गंदा पानी पाइपलाइन के जरिए कोरोनेशन पिलर एसटीपी तक लाया जाएगा. यहां इस पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा और फिर इसे यमुना में छोड़ा जाएगा.
वजीराबाद बैराज तक पहुंचेगा पानी
अधिकारियों के मुताबिक इस पूरी व्यवस्था में क्लोज डक्ट सिस्टम, पंपिंग स्टेशन और एलिवेटेड चैनल बनाए जाएंगे. ट्रीटमेंट के बाद साफ पानी को वजीराबाद बैराज तक पहुंचाया जाएगा, जिससे यमुना में पानी का बहाव बढ़ सके.
यह बहाव ई-फ्लो (Environmental Flow) कहलाता है, यानी नदी को जीवित और स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी न्यूनतम जल प्रवाह. विशेषज्ञों का मानना है कि ई-फ्लो बढ़ने से यमुना की स्वच्छता, जैव विविधता और ऑक्सीजन स्तर में सुधार होगा.
खर्च कौन उठाएगा, कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?
परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस योजना की निर्माण लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होगी. इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है और इसे राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत फंड किया जा रहा है.
सरकार का दावा है कि यह पूरी परियोजना डेढ़ साल में पूरी कर ली जाएगी, जो यमुना की सफाई की दिशा में अब तक का सबसे तेज और बड़ा प्रयास माना जा रहा है.
परियोजना में क्या-क्या होगा शामिल?
योजना के तहत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा. इनमें शामिल हैं:
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहांगीरपुरी नाले को पार करने के लिए ऊंचे RCC चैनल बनाए जाएंगे. इसके लिए दो बड़े पंपिंग स्टेशन प्रस्तावित हैं- एक 64 MLD का पंपिंग स्टेशन जो गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचाएगा और दूसरा 318 MLD क्षमता वाला पंप हाउस, जो साफ पानी को यमुना तक ले जाएगा. इसके अलावा वजीराबाद तक पानी पहुंचाने के रास्ते में दो ट्रस ब्रिज भी बनाए जाएंगे.
पहले से केंद्र सरकार की निगरानी में थी योजना
24 जून 2025 को सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि केंद्र सरकार यमुना की सफाई योजना पर लगातार नजर बनाए हुए है. खासतौर पर कोरोनेशन पिलर और यमुना विहार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए ई-फ्लो बढ़ाने पर जोर दिया गया था. अब दिल्ली सरकार की यह योजना उसी दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है.
यमुना का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा प्रदूषित?
दिल्ली में यमुना का वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक का 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रदूषित है. यह पूरी नदी का सिर्फ 2 फीसदी हिस्सा है, लेकिन यहीं से यमुना में करीब 76 फीसदी प्रदूषण फैलता है.
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और विशेषज्ञों के अनुसार यमुना को स्वस्थ बनाए रखने के लिए 23 क्यूमेक्स पानी की जरूरत होती है, जबकि फिलहाल इसमें केवल 10 क्यूमेक्स पानी ही बह रहा है. ट्रीटेड पानी को वापस नदी में छोड़ने से इस कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकेगा.
खुले नालों से बचेगा साफ पानी
अधिकारियों ने बताया कि नया सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया है कि खुले नालों को पूरी तरह बायपास किया जा सके. खुले नाले अक्सर साफ पानी को फिर से गंदा कर देते हैं, जिससे सफाई का पूरा उद्देश्य खत्म हो जाता है.
यमुना पर लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ता भीम सिंह रावत ने कहा कि इस योजना से प्रदूषण में कुछ हद तक जरूर कमी आएगी, लेकिन पानी की मात्रा अब भी चिंता का विषय है. उनका कहना है कि नदी में छोड़े जाने वाले साफ पानी की गुणवत्ता पर खास ध्यान देना जरूरी होगा और यह पानी इनलैंड वाटर स्टैंडर्ड के अनुसार और अधिक शुद्ध होना चाहिए.
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