वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने ट्रंप को सौंपा अपना नोबेल पुरस्कार, जानें क्या कहता है नियम?

वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की.

Maria Machado hands over her Nobel Prize to Trump
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वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की. यह बैठक गुरुवार को हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य, लोकतंत्र और स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की.

इस मुलाकात के बाद मचाडो ने एक प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल राष्ट्रपति ट्रंप को भेंट किया. उन्होंने कहा कि यह मेडल वेनेजुएला की आज़ादी और लोकतंत्र के लिए ट्रंप की “असाधारण प्रतिबद्धता” को सम्मानित करने के उद्देश्य से दिया गया है.

मचाडो ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी औपचारिक पुरस्कार हस्तांतरण के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और नैतिक प्रतीक के तौर पर उठाया गया है. उनका कहना था कि ट्रंप ने वेनेजुएला के संकट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गंभीरता से उठाया और तानाशाही के खिलाफ कठोर रुख अपनाया.

सिमोन बोलिवर और वॉशिंगटन से जुड़ा संदर्भ

मेडल देने के पीछे की भावना को समझाते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान स्वतंत्रता सेनानी सिमोन बोलिवर से जुड़ा एक ऐतिहासिक किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि लगभग दो शताब्दी पहले फ्रांसीसी जनरल मार्क्विस डी लायाफेट ने बोलिवर को एक मेडल भेंट किया था, जिस पर अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की आकृति उकेरी गई थी.

बोलिवर ने उस मेडल को जीवन भर अपने पास संजोकर रखा था. मचाडो के अनुसार, इतिहास के उसी प्रतीकात्मक क्रम में अब बोलिवर की धरती से निकले लोग वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी को एक मेडल लौटा रहे हैं — इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल.

सिमोन बोलिवर का महत्व

सिमोन बोलिवर का नाम दक्षिण अमेरिका में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है. उनका जन्म 1783 में वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुआ था. उन्होंने वेनेजुएला समेत कई लैटिन अमेरिकी देशों को स्पेनिश शासन से स्वतंत्रता दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई.

उनके सम्मान में वेनेजुएला का आधिकारिक नाम “बोलिवेरियन रिपब्लिक ऑफ वेनेजुएला” रखा गया है, जबकि पड़ोसी देश बोलीविया का नाम भी उन्हीं से प्रेरित है.

वेनेजुएला में हालात तनावपूर्ण

मचाडो और ट्रंप की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब अमेरिका ने इसी महीने की शुरुआत में सैन्य कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था. इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में वेनेजुएला को लेकर बहस और तेज हो गई है.

ट्रंप और नोबेल पुरस्कार की चर्चा

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए. वे कई बार नोबेल कमेटी और नॉर्वे की सरकार की आलोचना भी कर चुके हैं. इसके बावजूद, पिछले वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए मारिया कोरिना मचाडो के नाम की घोषणा की गई थी.

पुरस्कार मिलने के बाद मचाडो ने इसे ट्रंप को समर्पित बताया था, जिसे अब उन्होंने मेडल भेंट करके प्रतीकात्मक रूप दिया.

नोबेल पुरस्कार के नियम क्या कहते हैं?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच नोबेल पीस सेंटर ने पुरस्कार से जुड़े नियमों को फिर से स्पष्ट किया है. नोबेल पीस सेंटर के अनुसार, नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल बेचा या किसी को दिया जा सकता है, लेकिन पुरस्कार का आधिकारिक खिताब कभी ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.

नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के नियमों के मुताबिक:

  • एक बार नोबेल पुरस्कार घोषित हो जाने के बाद उसे रद्द नहीं किया जा सकता
  • पुरस्कार साझा नहीं किया जा सकता
  • विजेता का दर्जा किसी और को नहीं दिया जा सकता

हालाँकि, मेडल का स्वामित्व बदल सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का खिताब हमेशा उसी व्यक्ति के नाम रहता है, जिसे पुरस्कार मिला हो.