Marhaura Sugar Mill: बिहार के सारण जिले की मढ़ौरा चीनी मिल, जो सालों से बंद पड़ी थी, अब एक बार फिर चालू होने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं. हाल ही में, तमिलनाडु के निवेशकों का एक दल मढ़ौरा चीनी मिल का दौरा करने आया और वहां की स्थितियों का मुआयना किया. इन निवेशकों ने इलाके के गन्ना किसानों से भी बातचीत की, जिसमें उन्होंने मिल, उत्पादन और बाजार से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की.
मढ़ौरा चीनी मिल काफी समय से बंद है और अब खंडहर में बदल चुकी है. ऐसे में, निवेशकों का यह दौरा इलाके के लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है. प्रतिनिधिमंडल ने मिल की वर्तमान स्थिति, मशीनरी और उपलब्ध संसाधनों का जायजा लिया. उनका मानना है कि यदि आधारभूत ढांचे को सही किया जाए, तो इस क्षेत्र में चीनी उद्योग को फिर से खड़ा किया जा सकता है.
सात निश्चय-3 योजना और मिलों का भविष्य
बिहार सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा, राज्य में 25 नई चीनी मिलें बनाने का भी योजना है. इसी पहल के तहत तमिलनाडु के एसएनजे ग्रुप के निवेशकों ने मढ़ौरा चीनी मिल का निरीक्षण किया.
किसानों से बातचीत
इस दौरे के दौरान, निवेशकों ने गन्ना किसानों से भी मुलाकात की. किसानों ने गन्ना उत्पादन से जुड़ी समस्याओं, लागत और बाजार की स्थिति के बारे में बताया. निवेशकों ने खेतों में जाकर गन्ने की फसल की स्थिति देखी और यह समझने की कोशिश की कि अगर मिल फिर से चलेगी, तो कच्चे माल की आपूर्ति किस स्तर तक हो पाएगी.
मढ़ौरा चीनी मिल का ऐतिहासिक महत्व
मढ़ौरा चीनी मिल का इतिहास बहुत पुराना है. इसे 1904 में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित किया गया था और यह बिहार की सबसे पुरानी चीनी मिलों में से एक मानी जाती है. अब, राज्य सरकार और निजी निवेशकों की पहल से इस मिल के फिर से चालू होने की उम्मीद जग गई है.
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