पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक निर्माणाधीन गोदाम के ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। तारातला क्षेत्र में हुए इस दुर्घटना में अब तक आठ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि तीन दर्जन के करीब मजदूर घायल हुए हैं। प्रशासन को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए बचाव अभियान लगातार जारी है।
यह दुर्घटना बुधवार दोपहर ब्रेस ब्रिज इलाके के पास स्थित एक निर्माणाधीन गोदाम में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निर्माणाधीन शेड का ऊपरी हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। लोहे और कंक्रीट से बनी भारी संरचना के नीचे काम कर रहे कई मजदूर दब गए। घटना इतनी तेजी से हुई कि वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया।
मृतकों की संख्या बढ़कर हुई आठ
शुरुआती रिपोर्टों में कुछ लोगों की मौत की जानकारी सामने आई थी, लेकिन जैसे-जैसे मलबा हटाया गया, मृतकों की संख्या बढ़ती गई। अब तक आठ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। घायलों को तत्काल एसएसकेएम अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
कई मजदूरों के फंसे होने की थी आशंका
हादसे के बाद प्रशासन को आशंका थी कि दर्जनभर से अधिक मजदूर मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की और लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। राहतकर्मियों ने मलबे से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल भेजा गया।
सेना और बचाव एजेंसियों ने संभाली कमान
दुर्घटना की सूचना मिलते ही भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बचाव कार्य को तेज करने के लिए भारी क्रेन, अत्याधुनिक उपकरण और स्निफर डॉग्स की मदद ली गई। कई घंटों तक चले अभियान के दौरान मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया गया ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
मुख्यमंत्री ने लिया हालात का जायजा
हादसे के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा किया और बचाव कार्यों की समीक्षा की। बाद में उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल भी जाना। मुख्यमंत्री ने इसे बेहद दुखद घटना बताते हुए कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ राहत कार्य में जुटी हैं।
निर्माण योजना पर उठे सवाल
प्रारंभिक जांच में निर्माण परियोजना की स्वीकृति और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। प्रशासन के अनुसार परियोजना को इसी वर्ष मंजूरी दी गई थी और अब यह जांच की जा रही है कि कहीं निर्माण संबंधी नियमों के पालन में कोई लापरवाही तो नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती संकेतों से योजना और निर्माण प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई, कई लोग गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइट से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें सुपरविजन और श्रमिक प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदारियों का पता लगाया जा सके।
एसआईटी करेगी विस्तृत जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। यह टीम हादसे के कारणों, निर्माण मानकों के पालन और संभावित लापरवाही की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
प्रभावित परिवारों के लिए हेल्पलाइन जारी
राज्य सरकार ने लोगों की सहायता के लिए आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष के माध्यम से हेल्पलाइन सेवाएं शुरू की हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री ने की आर्थिक सहायता की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की मदद दी जाएगी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं।
शोक और संवेदना का माहौल
हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया है कि पीड़ितों को हर संभव मदद दी जाएगी। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की गई है। अब सभी की निगाहें एसआईटी जांच और राहत अभियान की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके।
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