दूध-पनीर में मिलावट पड़ी भारी, महाराष्ट्र में मिलावटखोरों पर लगेगा मकोका, एकनाथ शिंदे का सख्त निर्देश

Maharashtra: दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश, मामलों की मजबूत पैरवी के लिए विशेष कानूनी टीम गठित करने को कहा.

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Maharashtra: दूध, पनीर और दूसरे खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई करने और गैर-जमानती मामले दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को महज सामान्य अपराध मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है.

शिंदे ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की अदालत में सुनवाई के दौरान कानूनी स्तर पर कोई कमी न रह जाए. इसके लिए अनुभवी कानून विशेषज्ञों की मदद लेने के साथ तत्काल एक विशेष कानूनी टीम गठित करने को कहा गया है.

मिलावट को बताया लोगों की जिंदगी से खिलवाड़

सह्याद्री अतिथि गृह में वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित लक्ष्यों और उनकी पूर्ति को लेकर बैठक आयोजित की गई थी. बैठक के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से प्रस्तुति दी गई. इसी दौरान उपमुख्यमंत्री ने खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि दूध और उससे बने उत्पादों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं. नकली पनीर, मिलावटी दूध और दूसरे मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है.

नकली पनीर और मिलावटी दूध पर खास नजर

सरकार की नजर खास तौर पर दूध में मिलावट, नकली पनीर और दूध से तैयार होने वाले दूसरे खाद्य उत्पादों पर है. अधिकारियों को ऐसे मामलों में कार्रवाई को प्रभावी बनाने और दोषियों के खिलाफ मजबूत मामले तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कार्रवाई केवल मिलावटखोरों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि अदालत में मामला मजबूत तरीके से पेश हो और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिल सके.

पहले भी कई बार हो चुकी है मकोका लगाने की घोषणा

महाराष्ट्र सरकार की ओर से मिलावटखोरी के खिलाफ मकोका लगाने की बात पहले भी कई बार कही जा चुकी है. दूध में मिलावट, नकली पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा सदन और सदन के बाहर होती रही है.

इसके अलावा प्रतिबंधित गुटखा बेचने वालों, गोवंश की अवैध तस्करी और अवैध कटाई जैसे मामलों में भी मकोका के इस्तेमाल की घोषणा की जा चुकी है. बावजूद इसके राज्य में नकली और मिलावटी सामान की बिक्री पूरी तरह रुक नहीं पाई है.

कार्रवाई के आंकड़ों पर भी उठते रहे हैं सवाल

मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद एक बड़ा सवाल यह है कि अब तक पकड़े गए आरोपियों में से कितने लोगों के खिलाफ वास्तव में मकोका के तहत कार्रवाई की गई. सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है.

दूध में मिलावट, नकली पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले सामने आते रहते हैं और आरोपी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन मकोका के तहत हुई कार्रवाई का स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आने से सरकारी दावों और जमीनी कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं.

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