Maharashtra: महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू, जबरन धर्म बदलवाने पर होगी 10 साल तक की सजा

Maharashtra Anti Conversion Law 2026: महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्त कानून लागू, अब जबरन या धोखे से धर्म बदलवाने पर होगी कड़ी कार्रवाई

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Maharashtra Anti Conversion Law 2026: महाराष्ट्र में जबरन, लालच, धोखाधड़ी या शादी का झांसा देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार का नया कानून अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित कर दिया गया है. नए कानून के लागू होने के साथ ही राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रिया और नियम पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त हो गए हैं. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य केवल अवैध और जबरन कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है, जबकि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक विवाह इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे.

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून हुआ लागू

महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद ने मार्च 2026 में बजट सत्र के दौरान 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, 2026' को पारित किया था. इसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के लिए भेजा गया. राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद 30 जुलाई 2026 को इसे राज्य सरकार ने आधिकारिक गजट में अधिसूचित कर दिया, जिसके साथ ही यह कानून पूरे महाराष्ट्र में प्रभावी हो गया.

स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए भी तय होगी प्रक्रिया

नए कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी दूसरे धर्म को अपनाना चाहता है, तो उसे धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी. धर्म परिवर्तन के बाद भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य रहेगा. सरकार का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वैच्छिक है और उस पर किसी प्रकार का दबाव या प्रलोभन नहीं है.

जबरन धर्मांतरण पर सख्त सजा का प्रावधान

अधिनियम में बलपूर्वक, धोखाधड़ी, गलत जानकारी, अनुचित प्रभाव, लालच, प्रलोभन या शादी का झांसा देकर कराए गए धर्म परिवर्तन को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है. ऐसे मामलों में पहली बार दोषी पाए जाने पर आरोपी को 7 साल तक की जेल हो सकती है. यदि वही व्यक्ति दोबारा ऐसा अपराध करता है तो सजा बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है.

परिवार के सदस्य भी दर्ज करा सकेंगे शिकायत

कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी व्यक्ति का जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो केवल पीड़ित ही नहीं बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार भी पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इससे पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता मिलने का रास्ता आसान होगा.

सरकार ने स्पष्ट किया कानून का उद्देश्य

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस कानून का उद्देश्य किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं है. सरकार का कहना है कि कानून केवल जबरन, धोखे या प्रलोभन के आधार पर होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया है. स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों और अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों के अधिकार इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे.

इन राज्यों की सूची में शामिल हुआ महाराष्ट्र

इस कानून के लागू होने के बाद महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जहां पहले से धर्मांतरण विरोधी कानून प्रभावी हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसी तरह के कानून पहले से लागू हैं. अब महाराष्ट्र भी इस श्रेणी में शामिल होकर अवैध धर्मांतरण के मामलों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने वाले राज्यों में गिना जाएगा.

क्या बदलेगा नए कानून से?

राज्य सरकार का मानना है कि नए कानून से जबरन या धोखाधड़ी के जरिए धर्म परिवर्तन के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही धर्म परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और कानूनी निगरानी में होगी.

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