Lifestyle News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग यह शिकायत करते हैं कि उन्हें बिना किसी साफ वजह के दिनभर थकान, सुस्ती और नींद महसूस होती रहती है. हैरानी की बात यह है कि कुछ लोग पूरी नींद लेने के बावजूद भी खुद को तरोताजा महसूस नहीं कर पाते.
काम में मन न लगना, हर वक्त आलस छाया रहना और छोटी-सी मेहनत के बाद भी शरीर का टूट जाना इस ओर इशारा कर सकता है कि शरीर में किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी हो रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि हर समय थकान महसूस होना सिर्फ लाइफस्टाइल का असर नहीं होता, बल्कि इसके पीछे शरीर से जुड़े कई अंदरूनी कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं.
लगातार थकान का असली मतलब क्या है
लगातार थकान का मतलब सिर्फ दिनभर काम करने के बाद थक जाना नहीं होता. इसमें आराम करने या सोने के बाद भी शरीर और दिमाग में भारीपन बना रहता है. व्यक्ति की रोजमर्रा की एक्टिविटी, एकाग्रता और मानसिक स्थिति तक प्रभावित होने लगती है. ऐसी थकान नॉर्मल फिजिकल थकावट से अलग होती है, क्योंकि यह लंबे समय तक बनी रहती है और धीरे-धीरे जीवन की गुणवत्ता पर असर डालने लगती है. इसका संबंध सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक कारणों से भी हो सकता है.
खून की कमी बन सकती है बड़ी वजह
लगातार थकान की सबसे आम वजहों में से एक एनीमिया यानी खून की कमी है. जब शरीर में हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स की मात्रा कम हो जाती है, तो शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इसका सीधा असर एनर्जी लेवल पर पड़ता है. ऐसे में व्यक्ति को हर समय कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और बिना काम किए भी थकान महसूस होती है. महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, खासकर आयरन की कमी के कारण.
विटामिन की कमी से क्यों घटती है एनर्जी
शरीर में कुछ जरूरी विटामिन्स की कमी भी थकान की बड़ी वजह बन सकती है. विटामिन बी12, विटामिन डी, विटामिन सी और फोलेट की कमी से शरीर की एनर्जी प्रोडक्शन प्रक्रिया प्रभावित होती है. इसका असर मांसपेशियों की कमजोरी, ध्यान न लगना, चिड़चिड़ापन और दिमाग में भारीपन यानी ब्रेन फॉग के रूप में दिखता है. कई लोग इन लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या धीरे-धीरे बढ़ती चली जाती है.
कब कहलाती है थकान ‘क्रोनिक’
अगर थकान महीनों तक लगातार बनी रहे और हल्की-सी शारीरिक या मानसिक गतिविधि के बाद भी शरीर पूरी तरह टूट जाए, तो यह क्रोनिक थकान का संकेत हो सकता है. इस स्थिति में नींद पूरी न होना, बार-बार सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, याददाश्त कमजोर होना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी दिक्कतें सामने आती हैं. ऐसी हालत में खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी हो जाता है.
मानसिक तनाव भी चुरा लेता है शरीर की ताकत
लगातार मानसिक तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव भी शरीर की एनर्जी को धीरे-धीरे खत्म कर देता है. लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से व्यक्ति मानसिक थकान का शिकार हो जाता है, जिसका असर फिजिकल एनर्जी पर भी साफ दिखाई देता है. चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगना, हर वक्त बोझिल महसूस करना और बर्नआउट जैसी स्थिति इसके आम लक्षण माने जाते हैं.
किन पोषक तत्वों की कमी से बढ़ती है थकावट
विशेषज्ञों के मुताबिक आयरन, विटामिन बी12, विटामिन डी और मैग्नीशियम शरीर में एनर्जी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. इन पोषक तत्वों की कमी होने पर व्यक्ति खुद को हर समय थका हुआ, कमजोर और सुस्त महसूस करता है. अगर लंबे समय से ऐसी समस्या बनी हुई है, तो सही जांच और संतुलित आहार के जरिए इसकी वजह जानना और समय पर समाधान करना बेहद जरूरी होता है.
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