Lakhimpur News: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सामने आया एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. मामला सिर्फ करोड़ों रुपये के आभूषणों के गायब होने का नहीं है, बल्कि उससे भी ज्यादा पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठाने वाला है. अदालत में पेश की गई रिपोर्ट में पुलिस ने दावा किया है कि मालखाने में रखे गए आभूषण संभवतः बंदरों द्वारा उठा लिए गए थे. इस दावे ने न केवल पीड़ित पक्ष को हैरान किया है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.
19 साल पुराने मामले से जुड़ा है विवाद
पूरा मामला वर्ष 2007 का है. लखीमपुर खीरी के निवासी मुदित अग्रवाल की पत्नी आभा अग्रवाल ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. उस समय पुलिस ने जांच के दौरान उनके शरीर पर मौजूद आभूषणों को अपने कब्जे में लेकर मालखाने में जमा करा दिया था. ये आभूषण केस प्रॉपर्टी के रूप में सुरक्षित रखे जाने थे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके.
समय बीतता गया और मामला अदालत में चलता रहा. इसी दौरान मालखाने की जिम्मेदारी संभालने वाले हेड मोहर्रिर चन्द्रिका पाल का वर्ष 2009 में निधन हो गया. बाद में दूसरे मोहर्रिर रामबख्श की भी मृत्यु हो गई. पुलिस का कहना है कि इन घटनाओं के बाद संबंधित आभूषणों की पोटली का कोई रिकॉर्ड नहीं मिल सका.
पुलिस का दावा- धूप में रखे गए गहने बंदर उठा ले गए
मामले में सबसे ज्यादा हैरानी पुलिस की उस दलील पर हो रही है, जिसमें कहा गया कि आभूषण भीग गए थे और उन्हें सुखाने के लिए धूप में रखा गया था. इसी दौरान बंदर उन्हें उठाकर ले गए. पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अंतिम रिपोर्ट न्यायालय को भेज दी गई है और विवेचना समाप्त कर दी गई है.
हालांकि, यह तर्क अब लोगों के बीच चर्चा और सवालों का विषय बन गया है. आमतौर पर पुलिस मालखानों को संवेदनशील और सुरक्षित स्थान माना जाता है, जहां केस से जुड़े सबूत और जब्त सामान संरक्षित रखे जाते हैं. ऐसे में करोड़ों रुपये के आभूषणों के गायब होने की वजह के तौर पर बंदरों का जिक्र कई लोगों को अविश्वसनीय लग रहा है.
पीड़ित पक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
मुदित अग्रवाल और उनके वकील शैलेंद्र सिंह गौड़ ने पुलिस के दावे पर गंभीर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि जिन आभूषणों की बात की जा रही है, वे अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले महत्वपूर्ण साक्ष्य थे. ऐसे में उनका इस तरह गायब हो जाना बेहद गंभीर मामला है.
वकील का आरोप है कि पुलिस की रिपोर्ट और न्यायालय में उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच विरोधाभास दिखाई देता है. उनका कहना है कि पुलिस मामले की वास्तविकता सामने लाने के बजाय जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है. पीड़ित पक्ष का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि आखिर आभूषण कहां गए.
दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या का मामला भी रहा चर्चा में
आभा अग्रवाल की मौत के बाद दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़ा मामला दर्ज किया गया था. हालांकि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद इस मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया. इसके बावजूद केस प्रॉपर्टी के रूप में जमा किए गए आभूषणों का गायब होना एक नया विवाद खड़ा कर रहा है. मुदित अग्रवाल का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और वह चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो. उनके अनुसार, यदि अदालत की निगरानी में जांच होती है तो सच्चाई सामने आ सकती है.
कोर्ट की नजर अब पुलिस की रिपोर्ट पर
फिलहाल इस पूरे मामले में अदालत ने रिपोर्ट तलब की है. न्यायालय अब यह देखेगा कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड में कितना सामंजस्य है. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि करोड़ों रुपये के आभूषणों की सुरक्षा में आखिर किस स्तर पर चूक हुई.
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