Laddu Gopal Chhathi: जन्माष्टमी के बाद आज मनाई जा रही कान्हा की छठी, ऐसे करें लड्डू गोपाल की सेवा

Laddu Gopal Chhathi: जन्माष्टमी के बाद आज 9 सितंबर को मनाई जा रही लड्डू गोपाल की छठी, भक्त बाल गोपाल को नवजात शिशु मानकर कर रहे विशेष सेवा, स्नान-श्रृंगार के बाद सात्विक भोग लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि की मांग रहे आशीर्वाद.

laddu-gopal-chhathi-2026-today-puja-vidhi-bhog-rituals
AI Generated

Laddu Gopal Chhathi: जन्माष्टमी के उल्लास के बाद अब घर-घर में बाल गोपाल की छठी मनाने की तैयारी है. आज यानी 9 सितंबर 2026, बुधवार को भक्त लड्डू गोपाल को नवजात बालक के रूप में पूजेंगे और उनकी विशेष सेवा करेंगे. इस दिन कान्हा को स्नान कराने, नए वस्त्र पहनाने, श्रृंगार करने और सात्विक पकवानों का भोग लगाने की परंपरा है. मान्यता है कि जिस तरह घर में बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी का उत्सव मनाया जाता है, उसी भाव से भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की भी छठी मनाई जाती है.

आज क्यों मनाई जाती है लड्डू गोपाल की छठी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी के बाद बाल कृष्ण की छठी का पर्व मनाया जाता है. भक्त इस दिन लड्डू गोपाल को अपने घर के बच्चे की तरह मानकर उनकी सेवा करते हैं. उनकी पसंद के वस्त्र और श्रृंगार सामग्री अर्पित करने के साथ तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है. इसके साथ ही परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए भगवान कृष्ण से प्रार्थना की जाती है.

दूध और पंचामृत से कराएं स्नान

छठी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सबसे पहले बाल गोपाल की सेवा शुरू करें. लड्डू गोपाल को कच्चे दूध और पंचामृत से स्नान कराया जा सकता है. पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद उन्हें साफ जल से स्नान कराकर मुलायम कपड़े से अच्छी तरह पोंछें.

स्नान के बाद कान्हा को नए वस्त्र पहनाएं. पीले रंग के वस्त्र भगवान कृष्ण को प्रिय माने जाते हैं, इसलिए भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उन्हें पीले कपड़े पहना सकते हैं. इसके बाद मुकुट, कंगन, नजरिया, इत्र और अन्य आभूषणों से उनका सुंदर श्रृंगार करें.

बाल गोपाल को काजल लगाने की मान्यता

लड्डू गोपाल की छठी पर काजल लगाने की भी परंपरा बताई जाती है. मान्यता है कि इससे बाल गोपाल की नजर उतारी जाती है और उनकी रक्षा की कामना की जाती है. भक्त आंखों, तलवों या कान के पीछे प्रतीकात्मक रूप से काजल का छोटा सा टीका लगा सकते हैं. हालांकि आंखों के भीतर सीधे काजल लगाने से बचना बेहतर है.

कान्हा को लगाएं सात्विक पकवानों का भोग

छठी के मौके पर बाल गोपाल के लिए घर में सात्विक भोजन तैयार किया जाता है. भोग में बिना प्याज-लहसुन वाली कढ़ी-चावल, धनिया पंजीरी, मखाने की खीर, मिठाई और मौसमी फल शामिल किए जा सकते हैं. भोग की थाली में तुलसी दल रखना भी शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में तुलसी भगवान विष्णु और उनके कृष्ण स्वरूप को अत्यंत प्रिय मानी गई है.

भोग अर्पित करने के बाद परिवार के सभी सदस्य बाल गोपाल की आरती करें और कृष्ण भजन या बधाई गीत गाएं. इस दौरान भगवान से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है.

सात बार न्योछावर कर पूरी करें पूजा

छठी की पूजा में बाल गोपाल की नजर उतारने के लिए उनके सिर के ऊपर से पैसे सात बार न्योछावर करने की परंपरा भी है. इसके बाद इन पैसों को भगवान की सेवा में इस्तेमाल किया जा सकता है. अंत में धूप-दीप जलाकर लड्डू गोपाल की आरती करें और उन्हें प्रेमपूर्वक भोग अर्पित करें.

ये भी पढ़ें- Aaj ka Rashifal: कर्क-सिंह समेत इन राशियों के लिए खास है आज का दिन, जानें किसे मिलेगा भाग्य का साथ