Ayodhya Ram Mandir Dhwaj: प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति और भव्यता से जगमगाने जा रही है. जहां जनवरी में प्राण प्रतिष्ठा ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था, वहीं अब राम मंदिर में एक और ऐतिहासिक क्षण आने वाला है. 25 नवंबर को रामलला के मंदिर पर ध्वज स्थापना समारोह होगा, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात कर उन्हें औपचारिक रूप से आमंत्रण दिया. यह ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ‘राम मंदिर की पूर्णता का प्रतीक’ माना जा रहा है.
पांच दिन चलेगा धार्मिक अनुष्ठान
राम मंदिर के 161 फुट ऊंचे शिखर पर भगवा ध्वज फहराने से पहले 5 दिन तक विशेष पूजन और वैदिक अनुष्ठान होंगे. भगवा (केसरिया) रंग के इस ध्वज की लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट होगी.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि यह ध्वज वाल्मीकि रामायण में वर्णित सूर्य, ओम और कोविदार वृक्ष के प्रतीकों से सुसज्जित होगा. यह पवित्र ध्वज 42 फुट ऊ.चे खंभे पर लहराएगा, जो मंदिर के शिखर की शोभा को और बढ़ाएगा. ध्वज पर अंकित ‘ओमकार’ और ‘सूर्य चिह्न’ न केवल दिव्यता के प्रतीक हैं, बल्कि सनातन संस्कृति के शाश्वत संदेश को भी दर्शाते हैं.
अयोध्या में उमड़ेगा श्रद्धा और राजनीति का संगम
25 नवंबर को अयोध्या में न सिर्फ भक्तों की भीड़ उमड़ेगी, बल्कि देश के शीर्ष नेताओं का भी जमावड़ा रहेगा. सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर ‘विकसित उत्तर प्रदेश अभियान’ की समीक्षा करेंगे और विश्व स्काउट एवं गाइड जम्बूरी के प्रतिभागियों को भी संबोधित करेंगे, जिसमें 35,000 से अधिक कैडेटों के शामिल होने की संभावना है.
अयोध्या में इस आयोजन को ‘धार्मिक गौरव और राष्ट्रीय एकता’ का उत्सव बताया जा रहा है. विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और ट्रस्ट के सदस्य मिलकर यह संदेश देंगे कि अयोध्या अब केवल श्रद्धा की भूमि नहीं, बल्कि विश्व को जोड़ने वाली सांस्कृतिक राजधानी बन चुकी है.
‘राम मंदिर अब पूर्ण हुआ’
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद ध्वज स्थापना को राम मंदिर की अंतिम आध्यात्मिक पूर्णता माना जा रहा है. जैसे मंदिर की ऊंचाई आकाश को छूती है, वैसे ही यह ध्वज भारत की आस्था, एकता और आत्मगौरव का प्रतीक बनकर विश्व में संदेश देगा कि अयोध्या से अब केवल राम का नाम नहीं, बल्कि शांति, शक्ति और संस्कृति का प्रकाश फैल रहा है.
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