Tarn Taran Bypoll 2025: पंजाब की तरन तारन विधानसभा सीट पर जल्द ही उपचुनाव होने वाले हैं और राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है. इस सीट पर पिछली बार आप (AAP) के विधायक कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद यह जगह खाली हुई थी. अब कांग्रेस, आप, भाजपा और अकाली दल समेत सभी प्रमुख दल इस सीट को जीतने के लिए कड़ा मुकाबला कर रहे हैं. आइए जानते हैं किसने किसे बनाया उम्मीदवार और क्या है चुनाव की तैयारियां.
कांग्रेस ने घोषित किया उम्मीदवार
शुक्रवार को उपचुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने शनिवार (4 अक्टूबर) को तरन तारन से अपने उम्मीदवार के तौर पर करनबीर सिंह बुर्ज का नाम घोषित किया. पंजाब कांग्रेस के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी करनबीर सिंह को बधाई दी और पार्टी ने जोर देकर कहा कि इस उपचुनाव में वह बड़ी जीत दर्ज करेगी. कांग्रेस ने इस चुनाव को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने का एलान किया है.
अभी तक तारीख घोषित नहीं
हालांकि चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव की तारीख अभी तक घोषित नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी, जबकि अकाली दल दूसरे और कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी. अब सभी दल अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं ताकि उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके.
आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी
तैयारी में पीछे न रहते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को तरन तारन सीट से पूर्व तीन बार विधायक रह चुके हरमीत सिंह संधू को अपना उम्मीदवार घोषित किया. पार्टी ने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए अनुभवी और लोकप्रिय चेहरा चुना है, जो चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प बनाएगा.
बीजेपी और अकाली दल के प्रत्याशी
भारतीय जनता पार्टी ने इस उपचुनाव के लिए तरन तारन से हरजीत सिंह संधू को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने सुखविंदर कौर रंधावा को इस सीट पर चुनावी मैदान में उतारा है. दोनों पार्टियां भी जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुट गई हैं ताकि इस महत्वपूर्ण सीट पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकें.
मुकाबला होगा सियासी दिग्गजों के बीच
तरन तारन उपचुनाव इस बार राजनीतिक दांव-पेंच और रणनीतियों का अहम टर्न साबित होगा. हर पार्टी के काबिल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला बेहद रोचक रहने की संभावना है. कांग्रेस, आप, बीजेपी और अकाली दल, सभी की नजर इस सीट पर है क्योंकि यहां की जीत से राज्य की सियासत पर बड़ा असर पड़ेगा.
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