Jhansi News: झांसी में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 38 वर्षीय महिला ने अपने 13 वर्षीय बेटे की PUBG गेम की लत से परेशान होकर आत्महत्या कर ली. यह घटना न केवल एक मां की पीड़ा का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में डिजिटल लत के खतरों को लेकर भी एक गंभीर चेतावनी देती है. जब बच्चे के लिए की जाने वाली तमाम कोशिशें और समझाइशें भी बेअसर हो जाती हैं, तो परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव क्या हो सकता है, यह सोचने का विषय है.
झांसी में घटी दिल दहला देने वाली घटना
झांसी के आरएस रेजिडेंसी कॉलोनी में रहने वाली शीला सिंह, अपने पति और 13 वर्षीय बेटे के साथ एक सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रही थीं. शीला का पति, रविंद्र प्रताप सिंह, एक वित्तीय कंपनी में सेल्स मैनेजर के रूप में कार्यरत थे, और उनका बेटा कक्षा आठवीं का छात्र था. लेकिन पिछले कुछ समय से, शीला के जीवन में एक गंभीर संकट था, जिसे वह अकेले ही झेल रही थीं. उनका बेटा, जो पढ़ाई में अव्वल नहीं था, दिन-रात मोबाइल में उलझा रहता था, खासकर PUBG गेम में.
बेटे की लत और मां की मानसिक पीड़ा
परिवार के सदस्यों के अनुसार, शीला लगातार अपने बेटे को समझाती रहती थीं कि वह पढ़ाई पर ध्यान दे और मोबाइल से थोड़ी दूरी बनाए. मगर, उसका बेटा इस समझाइश को नजरअंदाज करता रहा. खेल की लत और डिजिटल दुनिया के प्रति बच्चे का बढ़ता आकर्षण शीला के लिए निराशा का कारण बन गया. वह एक ओर जहां अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंता करती थीं, वहीं दूसरी ओर इस स्थिति को बदलने की अपनी असमर्थता से मानसिक रूप से कमजोर हो गई थीं. कई बार बेटे से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन जब उसे कोई असर नहीं हुआ, तो शीला की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी.
आत्महत्या से पहले की पल-पल की दहशत
रात करीब 2 बजे जब रविंद्र प्रताप घर के मंदिर वाले कमरे में पहुंचे, तो उनकी आंखों के सामने वह दिल दहला देने वाली घटना घटी. शीला का शव कमरे में फंदे से लटक रहा था. परिवार में इस घटना ने तहलका मचा दिया. इस दुखद घटना की सूचना रक्सा थाना पुलिस को दी गई, जिसने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और जांच शुरू कर दी. पुलिस का कहना है कि अगर परिवार की ओर से कोई शिकायत मिलती है, तो वे आगे की कार्रवाई करेंगे.
डिजिटल लत का असर और परिवारों पर इसका प्रभाव
यह घटना एक गंभीर मुद्दे की ओर इशारा करती है—बच्चों के डिजिटल लत से परिवार के मानसिक स्वास्थ्य पर जो दबाव बनता है, वह कभी-कभी घातक साबित हो सकता है. जिला अस्पताल में तैनात मनोचिकित्सक डॉक्टर शिक़ाफा जाफरी के अनुसार, मोबाइल गेम्स और डिजिटल कंटेंट की लत केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी प्रभावित करती है. कई बार माता-पिता बच्चों के बर्ताव से खुद को असहाय महसूस करते हैं, जिससे तनाव और अवसाद गहराने लगता है.
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