किश्तवाड़ की त्रासदी के बाद फिर आफत, कठुआ में बादल फटा; कई घर मलबे में दबे

Kathua Cloudburst: जम्मू-कश्मीर की ज़मीन अभी किश्तवाड़ की आपदा से उबरी भी नहीं थी कि अब कठुआ जिले में कुदरत का कहर टूट पड़ा. रविवार, 17 अगस्त की सुबह कठुआ के जोड़ इलाके में बादल फटने की खबर से हड़कंप मच गया.

jammu kashmir Kishtwar disaster cloud burst in Kathua many houses buried in rubble
jammu kashmir Kishtwar disaster cloud burst in Kathua many houses buried in rubble

Kathua Cloudburst: जम्मू-कश्मीर की ज़मीन अभी किश्तवाड़ की आपदा से उबरी भी नहीं थी कि अब कठुआ जिले में कुदरत का कहर टूट पड़ा. रविवार, 17 अगस्त की सुबह कठुआ के जोड़ इलाके में बादल फटने की खबर से हड़कंप मच गया. इस घटना में कई घर मलबे की चपेट में आ गए हैं और जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे का एक हिस्सा भी प्रभावित हुआ है.

रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है. हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन भारी तबाही की आशंका ज़ाहिर की जा रही है.

हाईवे पर असर, एक ट्यूब बंद

बादल फटने से नेशनल हाईवे पर इतना मलबा आ गया है कि एक ट्यूब को पूरी तरह से बंद करना पड़ा है. इससे यातायात प्रभावित हो गया है और ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा जा रहा है. प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और मलबा हटाने के लिए मशीनरी लगाई गई है.

किश्तवाड़ की तबाही अभी ताज़ा ही थी...

यह घटना उस वक्त सामने आई है जब किश्तवाड़ जिले में बादल फटने से हुई भीषण त्रासदी को कुछ ही दिन हुए हैं. 14 अगस्त की रात को आई इस आपदा में अब तक 65 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 82 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं. गंभीर रूप से घायल लोगों को जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर्स ने 25 से अधिक बड़ी सर्जरी कर जान बचाने का प्रयास किया.

मुख्यमंत्री की मदद और संवेदना

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चशोती गांव का दौरा कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत पैकेज की घोषणा की. उन्होंने कहा कि जान गंवाने वालों के परिवारों को 2 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपये, और मामूली घायलों को 50,000 रुपये की सहायता दी जाएगी. साथ ही पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1 लाख, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए 50,000 और आंशिक नुकसान पर 25,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी.

प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती तीव्रता पर चिंता

लगातार हो रही इन घटनाओं ने राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है. पर्वतीय इलाकों में बढ़ती मानसूनी अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं. इन आपदाओं ने सिर्फ जान-माल का नुकसान नहीं किया, बल्कि स्थानीय लोगों के मानसिक और आर्थिक जीवन को भी बुरी तरह झकझोर दिया है.

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