महबूबा मुफ्ती समेत जम्मू-कश्मीर के कई नेता हाउस अरेस्ट, छात्रों के आंदोलन से पहले पुलिस का एक्शन

जम्मू-कश्मीर में छात्र आरक्षण नीति के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं को नजरबंद कर दिया है.

Jammu and KashmirMehbooba Mufti under house arrest
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में छात्र आरक्षण नीति के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं को नजरबंद कर दिया है. इस कार्रवाई में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी सहित कई अन्य नेता शामिल हैं.

यह कदम रविवार, 28 दिसंबर को श्रीनगर में उठाया गया. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए की गई है, जबकि विपक्ष इसे छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश बता रहा है.

किन नेताओं को किया गया नजरबंद

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिन नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है, उनमें महबूबा मुफ्ती के साथ उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती भी शामिल हैं. इसके अलावा श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी, पीडीपी नेता वहीद पारा और पूर्व श्रीनगर मेयर जुनैद मट्टू को भी नजरबंद किया गया है.

खबरों के मुताबिक, इन सभी नेताओं के आवासों के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया और उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई. उनके समर्थकों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है.

छात्र आंदोलन का क्या है पूरा मामला

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में छात्र मौजूदा आरक्षण नीति को लेकर नाराज हैं. उनका आरोप है कि कोटा प्रणाली को तर्कसंगत बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकार इस पर कोई ठोस फैसला नहीं ले पा रही है.

एक साल पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर एक समिति के गठन की घोषणा की थी, ताकि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जा सके. हालांकि छात्रों का कहना है कि अब तक उस समिति की रिपोर्ट या कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है.

इसी देरी के विरोध में छात्रों ने श्रीनगर के गुपकर रोड पर शांतिपूर्ण धरना देने का ऐलान किया था. कई राजनीतिक नेताओं ने इस आंदोलन के समर्थन में शामिल होने की बात कही थी, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सख्त कदम उठाए.

प्रशासन बनाम राजनीतिक दल

प्रशासन का तर्क है कि बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन से शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए एहतियातन यह कार्रवाई की गई. वहीं, नजरबंद किए गए नेताओं और विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है.

महबूबा मुफ्ती और अन्य नेताओं ने पहले ही छात्रों के मुद्दे को जायज बताया था और कहा था कि आरक्षण नीति से जुड़ा सवाल सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है. उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध किसी भी लोकतांत्रिक समाज का अहम हिस्सा होता है.

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