12 जनवरी 2026 को इसरो ने साल का पहला सैटेलाइट मिशन लॉन्त किया था. हालांकि लॉन्च के कुछ ही समय बाद जानकारी सामने आई कि मिशन सफल नहीं हो पाया. बता दें कि यह लॉन्च पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV)-C 62 से किया गया था. लेकिन आखिरी समय में गड़बड़ी के कारण मिशन फेल हुआ. कहा जा रहा है कि गड़बड़ी का कारण पता लगाया जा रहा है.
इस मिशन पर इसरो का भी बयान सामने आया है. बयान में कहा गया है कि PSLV-C62 मिशन में PS3 स्टेज के आखिर में एक गड़बड़ी आई. इसका डिटेल्ड एनालिसिस शुरू कर दिया गया है. कुल मिलाकर पहले लॉन्च में 15 सैटेलाइट्स स्पेस में भेजी गईं थीं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-N1) अन्वेषा भी शामिल थी.
600 किलोमीटर ऊपर से हर गतिविधि पर नजर
अन्वेषा को धरती से लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर पोलर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित किया जाना था. इस खास कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट तय समय पर धरती के हर संवेदनशील क्षेत्र से गुजरेगी. इसकी मदद से आतंकियों, घुसपैठियों और असामाजिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी. यही वजह है कि इसे ‘भारत का अंतरिक्ष सीसीटीवी’ भी कहा जा रहा है.
EOS-N1 अन्वेषा की सबसे बड़ी ताकत
इस सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. अन्वेषा की खासियत यह है कि यह केवल सतह पर मौजूद गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगलों, पहाड़ियों और बंकरों में छिपे ठिकानों की भी सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम है. दुश्मन चाहे कितनी भी चालाकी से छिपने की कोशिश करे, उसकी गतिविधियां अन्वेषा की नजर से बच पाना मुश्किल होगा.
सीमाओं की सुरक्षा में बनेगा मजबूत हथियार
600 किलोमीटर की ऊंचाई से यह सैटेलाइट चौबीसों घंटे निगरानी रखने में सक्षम होगी. इसके सक्रिय होने के बाद सीमावर्ती इलाकों में ड्रग्स और हथियारों की तस्करी, अवैध निर्माण और आतंकी मूवमेंट पर प्रभावी रोक लगेगी. सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह रियल-टाइम इंटेलिजेंस का अहम स्रोत बनेगा.
क्यों कहा जा रहा है इसे सेना का ‘सीक्रेट वेपन’
EOS-N1 एक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जो हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक पर आधारित है. यह तकनीक सामान्य सैटेलाइट्स की तुलना में प्रकाश के कई गुना अधिक स्पेक्ट्रम को पहचान सकती है. इसी वजह से जमीन पर मौजूद वस्तुओं, संरचनाओं और गतिविधियों की पहचान बेहद सटीक तरीके से हो पाती है. यही क्षमता इसे सेना के लिए एक गुप्त और घातक हथियार बनाती है.
PSLV-C62 मिशन की बड़ी उपलब्धि
अन्वेषा के अलावा PSLV-C62 मिशन के तहत कुल 15 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है. इनमें एक मुख्य भारतीय सैटेलाइट और 14 छोटे उपग्रह शामिल हैं. इन 14 में से 8 विदेशी सैटेलाइट हैं, जो फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और ब्रिटेन जैसे देशों के हैं. यह मिशन भारत की तकनीकी विश्वसनीयता और वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग को भी मजबूत करता है.कुल मिलाकर, EOS-N1 अन्वेषा सिर्फ एक सैटेलाइट नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, निगरानी और रणनीतिक ताकत का नया प्रतीक बनकर सामने आई है.
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