क्या नए जंग की तैयारी कर रहा इजरायल? गाजा युद्ध रुकने के बावजूद 2026 के रक्षा बजट में की भारी बढ़ोतरी

इजरायल सरकार ने वर्ष 2026 के लिए अपना वार्षिक बजट मंजूर किया है, जिसमें रक्षा क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व राशि आवंटित की गई है.

Israel made a huge increase in its defense budget
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तेल अवीव: इजरायल सरकार ने वर्ष 2026 के लिए अपना वार्षिक बजट मंजूर किया है, जिसमें रक्षा क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व राशि आवंटित की गई है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने रक्षा खर्च को बढ़ाकर 112 अरब शेकेल (लगभग 35 अरब डॉलर) कर दिया है. यह पहले प्रस्तावित 90 अरब शेकेल से काफी ज्यादा है, जो यह संकेत देता है कि देश सुरक्षा मोर्चे पर किसी भी नई चुनौती के लिए खुद को तैयार कर रहा है.

यह बजट अब इजरायल की संसद केनेसेट में पेश किया जाएगा, जहां इसे मंजूरी दिलाना नेतन्याहू के लिए आसान नहीं माना जा रहा. गठबंधन में चल रही अंदरूनी खींचतान आने वाले महीनों में राजनीतिक संकट भी खड़ा कर सकती है. अगर बजट मार्च तक पास नहीं हुआ तो इजरायल को चुनाव का सामना करना पड़ेगा.

रक्षा खर्च बढ़ाने के पीछे क्या कारण?

इजरायल के रक्षा मंत्री योआव काट्ज़ ने कहा कि बढ़ा हुआ बजट, इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) को और मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया आवश्यक कदम है. उन्होंने कहा, "हम सेना की क्षमताओं को अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं. यह बजट न सिर्फ सैनिकों की जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि रिज़र्व फोर्स पर पड़ रहा भारी बोझ भी कम करेगा."

माना जा रहा है कि IDF को आधुनिक हथियार प्रणालियों, मिसाइल डिफेंस तकनीकों, खुफिया क्षमताओं और ड्रोन-रोधी सिस्टम पर विस्तार से खर्च करना होगा. पिछले दो वर्षों में इजरायल कई मोर्चों पर संघर्ष झेल चुका है, और विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा रणनीति अब और कठोर होने जा रही है.

गाजा युद्धविराम के बावजूद खर्च क्यों बढ़ा?

हालांकि गाजा पट्टी में हमास के साथ संघर्ष को फिलहाल रोक दिया गया है, लेकिन पिछले वर्षों में युद्ध ने इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला है. 2024 में इजरायल ने गाजा और उत्तरी सीमाओं पर हिज़बुल्लाह के साथ चल रही झड़पों पर करीब 31 अरब डॉलर खर्च किए थे.

गाजा युद्ध ने यह साफ कर दिया कि देश को भविष्य में बड़े पैमाने पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है- खासतौर पर लेबनान, सीरिया और पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए. यही कारण है कि युद्धविराम के बावजूद रक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश जारी है.

बजट को लेकर सरकार के भीतर मतभेद

नेतन्याहू सरकार में शामिल अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी पार्टियां चाहती हैं कि उनके धार्मिक छात्रों को सेना में अनिवार्य सेवा से छूट मिले. वहीं दुसरी ओर कई गठबंधन साथी इसे मंजूर करने के खिलाफ हैं.

यही विवाद रक्षा बजट की प्रक्रिया को कठिन बना सकता है. कई मंत्रियों का मानना है कि जब सुरक्षा माहौल इतना तनावपूर्ण है, तब सेना सेवा में ढील समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है.

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