Oil Supply Threat: कच्चा-तेल $110 पार, ईरान ने दी ग्लोबल सप्लाई रोकने की धमकी, भारत पर क्या होगा असर?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच तीखी बयानबाजी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है.

Iran threatens to stop global Crude oil supply What will be the impact on India
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Oil Supply Threat: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच तीखी बयानबाजी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है.

तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत $1.71 बढ़कर $110.74 प्रति बैरल तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ, तो कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं.

यह तेजी ऐसे समय में आई है जब ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर बना हुआ है. तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक सप्लाई में संभावित बाधा के संकेत दे रहा है.

भारत पर सीधा असर, बढ़ेगा आयात बिल

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ेगा, जो अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत में $1 प्रति बैरल की वृद्धि लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत का सालाना आयात बिल करीब ₹16,000 करोड़ तक बढ़ सकता है.

इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा, क्योंकि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं.

महंगाई पर दबाव, अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती

रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत में खुदरा महंगाई करीब 0.60% तक बढ़ सकती है.

महंगे तेल का असर सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे चालू खाते का घाटा (CAD), रुपए की कीमत और आर्थिक विकास दर पर भी दबाव बढ़ सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट पर टकराव, बढ़ा वैश्विक तनाव

तनाव की बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी विवाद है. यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जहां से दुनिया के कुल तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने इस रास्ते को नहीं खोला, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है.

ईरान का पलटवार, सप्लाई चेन रोकने की धमकी

अमेरिका की चेतावनी के बाद ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है. ईरानी नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ सलाहकारों ने संकेत दिया है कि अगर हमला होता है, तो वह वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर सकता है.

ईरान ने साफ किया है कि वह सिर्फ होर्मुज ही नहीं, बल्कि बाब-अल-मंदेब जैसे अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को भी निशाना बना सकता है. इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है.

OPEC का फैसला, बढ़ाया जाएगा उत्पादन

इस बीच तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए OPEC ने भी कदम उठाया है. सऊदी अरब और रूस समेत आठ देशों ने बैठक कर मई 2026 से उत्पादन में रोजाना 2.06 लाख बैरल की बढ़ोतरी का फैसला लिया है.

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो यह बढ़ोतरी भी कीमतों को ज्यादा समय तक नियंत्रित नहीं कर पाएगी.

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