Meenakshi Natarajan News: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता.
जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस चंदूकर की पीठ ने सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. मीनाक्षी नटराजन ने अपनी राज्यसभा उम्मीदवारी रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी.
कोर्ट में सिंघवी ने रखी दलील
मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि उम्मीदवार का नामांकन जिस आधार पर खारिज किया गया, वह चौंकाने वाला है.
सिंघवी ने दलील दी कि मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा है और उसमें अभी तक किसी अपराध का संज्ञान भी नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून के अनुसार नामांकन रद्द करने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है.
Supreme Court rejects Congress Rajya Sabha candidate from Madhya Pradesh, Meenakshi Natarajan’s plea challenging rejection of her nomination papers.
— ANI (@ANI) June 12, 2026
“We are not inclined to entertain this petition and it is hereby dismissed”, the Court said. https://t.co/q1JELhwpJd pic.twitter.com/ANAe8p9gbo
हाईकोर्ट जाने की सलाह
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन चाहें तो चुनाव याचिका के जरिए हाईकोर्ट का रुख कर सकती हैं. अदालत ने संकेत दिया कि चुनाव से जुड़े विवादों के समाधान के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया मौजूद है.
2022 के मामले का दिया हवाला
सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला वर्ष 2022 का है और उस समय मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रभारी भी नहीं थीं. उन्होंने कहा कि यह एक निजी शिकायत से जुड़ा मामला है, जिसमें अदालत ने केवल प्रारंभिक नोटिस जारी किया था और किसी अपराध का औपचारिक संज्ञान नहीं लिया गया था.
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि रिटर्निंग ऑफिसर मनमाने तरीके से फैसला लेता है और उससे किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचता है, तो अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए.
नतीजे घोषित करने के समय पर भी उठाए सवाल
सिंघवी ने यह सवाल भी उठाया कि नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख वाले दिन ही चुनाव परिणाम क्यों घोषित कर दिए गए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुआ. अंत में अदालत ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज कर दी और उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उचित मंच का इस्तेमाल करने की सलाह दी.
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