Iran War: अमेरिकी नेवी के फिफ्थ फ्लीट पर ईरान का बड़ा हमला, 21 सैनिकों की मौत, कब रुकेगी ये जंग?

मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदलता नजर आ रहा है.

Iran attack on US Navy Fifth Fleet in bahrain 21 soldiers died
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदलता नजर आ रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के बीच ईरानी आर्म्ड फोर्सेज ने दावा किया है कि उन्होंने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े को निशाना बनाया है. ईरान के अनुसार इस हमले में उसके 21 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक यह घटना उस समय हुई जब क्षेत्र में तनाव चरम पर था और अमेरिकी नौसैनिक बलों तथा ईरानी सैन्य ठिकानों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई थी. हमलों के दौरान कई ठिकानों और सैन्य परिसरों को निशाना बनाया गया, जिससे ईरानी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा.

मनामा में अमेरिकी नेवी मुख्यालय पर हमला

ईरान ने बहरीन की राजधानी मनामा के जुफैर इलाके में स्थित यूनाइटेड स्टेट्स नेवी के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर हमला करने का दावा किया है. ईरानी मीडिया की ओर से जारी एक वीडियो में हमले के बाद इलाके में आग और धुएं के गुबार उठते दिखाई देने का दावा किया गया है.

अमेरिकी नौसेना का यह बेड़ा नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन में तैनात है और मध्य-पूर्व में अमेरिका की सबसे अहम सैन्य मौजूदगी माना जाता है.

क्या है अमेरिका का पांचवां नौसैनिक बेड़ा

अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट करीब 25 लाख वर्ग मील के समुद्री क्षेत्र की निगरानी करता है. इसके अधिकार क्षेत्र में पर्शियन गल्फ, रेड सी और अरब सागर जैसे अहम समुद्री क्षेत्र आते हैं.

इस बेड़े की प्रमुख जिम्मेदारी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है.

आमतौर पर इस फ्लीट में 8,000 से ज्यादा नौसैनिक तैनात रहते हैं और इसके साथ कई युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर, पनडुब्बियां तथा ड्रोन सिस्टम भी शामिल रहते हैं. यह बेड़ा 40 से अधिक देशों के समुद्री गठबंधन “कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज” के साथ मिलकर समुद्री डकैती रोकने, आतंकवाद से मुकाबला करने और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा जैसे मिशनों पर काम करता है.

फरवरी में भी हुआ था हमला

इससे पहले 28 फरवरी 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद-136 ड्रोन के जरिए इसी बेस पर हमला किया था. उस समय सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियो में बेस से काला धुआं उठता देखा गया था.

रिपोर्टों के अनुसार उस हमले में रडार सिस्टम, सर्विस बिल्डिंग और सैटेलाइट कम्युनिकेशन उपकरणों को नुकसान पहुंचा था. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक हमले के दौरान सैनिक सुरक्षित बंकरों में चले गए थे, हालांकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कम से कम तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई थी.

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का जवाब बताया

ईरान ने इस ताजा हमले को अमेरिका और इजराइल के कथित संयुक्त अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” की जवाबी कार्रवाई बताया है. ईरान का कहना है कि इस अभियान में उसके कई वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया गया था.

रिपोर्टों के मुताबिक बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक तैनाती बढ़ा दी थी और ईरान को रोकने के लिए अपने नौसैनिक बेड़े का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी इलाके में तैनात किया गया था.

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