Iron Beam: मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच इजरायल ने अपनी रक्षा तकनीक में एक बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार ‘आयरन बीम’ नाम के हाई-पावर लेजर सिस्टम का वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल किया है.
ईरान से जुड़े तनाव और हिजबुल्लाह की ओर से दागे गए रॉकेट्स को इस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया. इस नई तकनीक ने आधुनिक युद्ध के स्वरूप को बदलने की दिशा में एक अहम संकेत दिया है.
आयरन बीम क्या है?
‘आयरन बीम’ एक अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो हाई एनर्जी लेजर वेपन सिस्टम (HELWS) पर आधारित है. इसे Rafael Advanced Defense Systems ने विकसित किया है. लगभग 100 किलोवॉट क्षमता वाला यह लेजर सिस्टम कम दूरी के खतरों जैसे रॉकेट, मोर्टार, आर्टिलरी शेल और ड्रोन को कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर निष्क्रिय करने में सक्षम है.
यह सिस्टम इजरायल की मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें Iron Dome, David's Sling और Arrow missile system जैसे अन्य प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं. ‘आयरन बीम’ को ‘ओर ईतान’ नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘मजबूत रोशनी’.
इसकी संरचना में एक एयर डिफेंस रडार, लेजर जनरेटर और कमांड यूनिट शामिल होते हैं. यह सिस्टम स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकता है और अन्य रक्षा प्रणालियों के साथ मिलकर भी ऑपरेट किया जा सकता है. इसकी सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक गोला-बारूद की जरूरत नहीं होती, क्योंकि यह पूरी तरह बिजली से संचालित होता है.
यह सिस्टम कैसे काम करता है?
‘आयरन बीम’ फाइबर लेजर तकनीक पर आधारित है. जैसे ही कोई रॉकेट या ड्रोन इजरायल की सीमा की ओर बढ़ता है, रडार सिस्टम उसे तुरंत पहचान लेता है और ट्रैकिंग शुरू हो जाती है. इसके बाद लक्ष्य पर एक शक्तिशाली लेजर बीम फोकस की जाती है, जो प्रकाश की गति से टारगेट तक पहुंचती है.
यह लेजर एक ही बिंदु पर अत्यधिक ऊर्जा केंद्रित करता है, जिससे लक्ष्य का बाहरी हिस्सा तेजी से गर्म होकर पिघल जाता है या विस्फोट हो जाता है. पूरा यह प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाती है. तकनीक इस तरह से डिजाइन की गई है कि कई छोटी बीम्स एक साथ मिलकर एक सटीक बिंदु पर असर डालती हैं, जिससे प्रभाव और भी अधिक घातक हो जाता है.
इस सिस्टम की एक बड़ी खासियत इसकी लागत है. जहां पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्शन में हजारों डॉलर खर्च होते हैं, वहीं ‘आयरन बीम’ का एक शॉट केवल कुछ डॉलर के बराबर बिजली खर्च में पूरा हो जाता है. इसकी प्रभावी रेंज करीब 10 किलोमीटर तक मानी जाती है, हालांकि इसे आगे और बेहतर बनाने पर काम जारी है.
पहली बार युद्ध में इस्तेमाल
इस तकनीक की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब इजरायल ने पहली बार इसका कॉन्सेप्ट पेश किया था. लंबे समय तक परीक्षण और विकास के बाद सितंबर 2025 में इसे ऑपरेशनल घोषित किया गया. दिसंबर 2025 में इसका पहला कॉम्बैट-रेडी संस्करण Israeli Air Force को सौंपा गया.
लगभग 500 मिलियन डॉलर के निवेश और वर्षों की रिसर्च के बाद यह दुनिया का पहला पूरी तरह ऑपरेशनल हाई-पावर लेजर डिफेंस सिस्टम बना. 2026 में जारी संघर्ष के दौरान, ‘रोरिंग लायन’ नामक ऑपरेशन में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया. 2 मार्च को इजरायली सेना ने पुष्टि की कि हिजबुल्लाह द्वारा दागे गए रॉकेट्स को इस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया.
फायदे और सीमाएं
‘आयरन बीम’ को भविष्य के युद्ध का गेमचेंजर माना जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कम लागत, तेज प्रतिक्रिया और लगभग अनलिमिटेड फायरिंग क्षमता है. खासतौर पर ड्रोन युद्ध के दौर में यह बेहद प्रभावी साबित हो सकता है, क्योंकि सस्ते ड्रोन को महंगी मिसाइलों से रोकना व्यावहारिक नहीं होता.
हालांकि, इस सिस्टम की कुछ सीमाएं भी हैं. इसकी रेंज अभी सीमित है और बड़े या भारी लक्ष्यों पर इसका असर कम हो सकता है. इसके अलावा मौसम भी इसकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है, जैसे घने बादल या बारिश में इसकी प्रभावशीलता घट सकती है. फिर भी, इजरायल लगातार इसे और उन्नत बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
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