Bihar Infrastructure Development: बिहार में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में इस साल एक नई शुरुआत हो चुकी है. वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य को केंद्र सरकार की ओर से सड़क और रेल परियोजनाओं की ऐतिहासिक सौगात मिली है. इन परियोजनाओं का मकसद सिर्फ यात्रियों की सहूलियत बढ़ाना ही नहीं, बल्कि राज्य में रोजगार, निवेश, पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी रफ्तार देना है.
बिहार को ₹33,464 करोड़ की लागत से कुल 52 हाईवे परियोजनाएं मिली हैं. इनमें सड़क चौड़ीकरण, बाईपास, नए पुल और हाई-स्पीड कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं. ये परियोजनाएं प्रदेश के कई जिलों को जोड़ेंगी और लंबे समय से चली आ रही यातायात समस्याओं को कम करेंगी.
प्रमुख सड़क परियोजनाएं:
साहिबगंज-अरेराज-बेतिया 4-लेन हाईवे
78.94 किमी लंबी यह परियोजना पटना और उत्तर बिहार के कई जिलों को जोड़ेगी.
मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड हाईवे
82.4 किमी लंबा कॉरिडोर बक्सर-भागलपुर हाइवे नेटवर्क को मजबूत करेगा.
कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल
भारत का सबसे लंबा पुल बनने जा रहा यह प्रोजेक्ट जुलाई 2025 तक पूरा होगा.
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे
पूर्वी बिहार को राजधानी पटना से हाई-स्पीड एक्सेस देगा.
अशोक राजपथ डबल-डेकर फ्लाईओवर (पटना)
मार्च 2025 तक पूरा होने वाला यह फ्लाईओवर पटना की ट्रैफिक भीड़ को कम करेगा.
गंडक नदी पर नया पुल (मुजफ्फरपुर)
फतेहाबाद से चंचलियां के बीच बनने वाला यह पुल उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा.
6 बड़ी लाइनें और कई डबलिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
बिहार में रेलवे के क्षेत्र में भी तेज़ी से काम हो रहा है. 2025-26 में रेल कनेक्टिविटी और फ्रेट कॉरिडोर को ध्यान में रखते हुए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं.
प्रमुख रेल परियोजनाएं:
बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया लाइन डबलिंग (₹2,192 करोड़, 104 किमी)
तीर्थ स्थलों की बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ यह प्रोजेक्ट राज्य की रेल रफ्तार को बढ़ाएगा.
भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट डबलिंग (₹3,169 करोड़, 177 किमी)
यह प्रोजेक्ट बिहार-झारखंड और बंगाल के बीच आवाजाही को सरल बनाएगा.
सकरी-फारबिसगंज और समस्तीपुर-हसनपुर-खगड़िया
सर्वे की मंजूरी मिल चुकी है, जल्द निर्माण कार्य शुरू होगा.
आरा-सासाराम लाइन डबलिंग
इसे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिससे माल ढुलाई में तेजी आएगी.
विक्रमशिला-कटरिया नई रेल लाइन (26 किमी)
गंगा नदी पर पुल समेत यह प्रोजेक्ट सीमांचल के विकास में सहायक होगा.
अररिया-गलगालिया-ठाकुरगंज नई रेल लाइन (111 किमी)
नेपाल सीमा और सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगा.
शेखपुरा-बरबीघा-बिहारशरीफ-दनियावां नई रेल लाइन
22 साल बाद इस रूट पर ट्रेनें दौड़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा.
विकास की ओर अग्रसर बिहार
इन परियोजनाओं से न केवल यातायात में तेज़ी और सुविधा आएगी, बल्कि इससे औद्योगिक निवेश, ट्रांसपोर्ट सेक्टर, और टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा. नालंदा, राजगीर, पावापुरी जैसे ऐतिहासिक स्थानों तक पहुंच और आसान होगी, जिससे बौद्ध सर्किट को ग्लोबल टूरिज्म में बढ़ावा मिलेगा.
2025 बन सकता है बिहार के विकास का टर्निंग पॉइंट
बिहार अब सिर्फ विकास की दौड़ में नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति की दिशा में भी बड़े कदम बढ़ा चुका है. ये सड़क और रेल परियोजनाएं न केवल आज का नक्शा बदलेंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सशक्त आधारशिला बनेंगी.
यह भी पढ़ें- सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, पहलगाम आतंकी हमले में शामिल लश्कर का मददगार कटारिया गिरफ्तार