Indus Water Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को स्थगित कर दिया था. भारत अपने फैसले पर कायम है और पाकिस्तान की मांग के बावजूद संधि बहाल करने के मूड में नहीं दिख रहा है. दूसरी तरफ, पाकिस्तान लगातार इस फैसले का विरोध कर रहा है. कभी वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ आवाज उठाता है तो कभी धमकी भरे बयान देता है. अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर अपने विकल्पों पर विचार कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अपना रुख और सख्त कर सकता है.
दरअसल, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के साथ सिंधु जल संधि को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने संकेत दिए हैं कि इस्लामाबाद अब केवल बातचीत और कानूनी रास्तों तक सीमित नहीं रहना चाहता. भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आगे की रणनीति तैयार कर रहा है.
ख्वाजा आसिफ ने फिर दी भारत को धमकी
एक इंटरव्यू के दौरान ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान हर स्थिति पर नजर रख रहा है. अगर हालात बिगड़ते हैं और किसी जवाबी कदम की जरूरत महसूस होती है, तो इस बारे में सरकार के बड़े नेताओं के साथ चर्चा की जाएगी.
हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी सैन्य कार्रवाई का ऐलान नहीं किया. लेकिन उनके बयान से साफ है कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ अपना रुख और कड़ा करने की तैयारी में है.
किस सवाल पर बौखलाया पाकिस्तान?
इंटरव्यू के दौरान ख्वाजा आसिफ से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान सिंधु जल संधि के मामले में दूसरे रास्तों से समाधान निकलने का इंतजार करता रहेगा या फिर किसी ठोस कार्रवाई पर विचार करेगा?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार लगातार पूरे मामले का आकलन कर रही है. अगर कहीं भी अपना रुख सख्त करने की जरूरत पड़ी तो सरकार के शीर्ष स्तर पर इस पर बातचीत की जाएगी.
आसिफ ने कहा, 'हम लगातार स्थिति का आकलन कर रहे हैं. जहां भी हमें अपना रुख सख्त करने की जरूरत होगी, वहां सरकार के शीर्ष स्तर पर चर्चा की जाएगी कि कौन से विकल्प अपनाए जा सकते हैं और क्या कदम उठाए जा सकते हैं.'
सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से परेशान पाकिस्तान
ख्वाजा आसिफ के बयान से संकेत मिलते हैं कि पाकिस्तान अब भारत के फैसले के खिलाफ नए विकल्प तलाश रहा है. अभी तक इस्लामाबाद इस मामले को राजनयिक और कानूनी मंचों पर उठाता रहा है. लेकिन अब रक्षा मंत्री के बयान से माना जा रहा है कि पाकिस्तान दूसरे कदमों पर भी विचार कर सकता है.
हालांकि, ख्वाजा आसिफ ने यह साफ नहीं किया कि पाकिस्तान किन विकल्पों पर विचार कर रहा है. उन्होंने यह भी नहीं बताया कि क्या सरकार किसी सैन्य कार्रवाई के बारे में गंभीरता से सोच रही है.
पहलगाम हमले के बाद भारत ने स्थगित की थी संधि
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि साल 1960 में हुई थी. इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे.
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हमला किया था. इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी. इसके अगले दिन यानी 23 अप्रैल 2025 को भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था.
भारत ने साफ कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी. वहीं, पाकिस्तान ने भारत के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि कोई भी देश एकतरफा तरीके से इस समझौते को स्थगित नहीं कर सकता.
अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सिंधु जल संधि का विवाद
सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों तक पहुंच चुका है. 31 अगस्त 2026 को हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (स्थायी मध्यस्थता न्यायालय) ने एक अहम फैसला सुनाया था.
अदालत ने कहा था कि सिंधु जल संधि अभी भी लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से स्थगित नहीं कर सकता. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में बन रही रातले जलविद्युत परियोजना को लेकर भी अंतरिम निर्देश जारी किए गए थे.
भारत ने अदालत के फैसले को नहीं माना
हालांकि, भारत ने इस अदालत के अधिकार क्षेत्र को मानने से इनकार कर दिया है. भारत का कहना है कि इस मामले में अदालत की कार्यवाही को मान्यता नहीं दी जा सकती. साथ ही, सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख भी साफ है.
दूसरी तरफ, पाकिस्तान इस कानूनी प्रक्रिया के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के फैसले को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है. इस्लामाबाद लगातार आरोप लगाता रहा है कि भारत पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. ऐसे में ख्वाजा आसिफ का ताजा बयान बताता है कि सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव फिलहाल कम होने के आसार नहीं हैं.
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