इस मुस्लिम देश में शादी से पहले सेक्स पर होगी जेल, सरकार पर भी नहीं उठा सकते सवाल

इंडोनेशिया में 2 जनवरी 2026 से एक नया आपराधिक कानून लागू होने जा रहा है, जो देश में विवादों और चिंताओं का कारण बन चुका है.

Indonesia Bans Pre Marital Sex Couple will Arrest
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Bharat 24

इंडोनेशिया में 2 जनवरी 2026 से एक नया आपराधिक कानून लागू होने जा रहा है, जो देश में विवादों और चिंताओं का कारण बन चुका है. यह नया कानून खासतौर पर यौन संबंधों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी कई संवेदनाओं को प्रभावित करता है. इस कानून के तहत, शादी से पहले यौन संबंध और राष्ट्रपति या सरकारी संस्थानों की आलोचना को अब अपराध माना जाएगा. इस नए कानून को लेकर देश में एक बड़ी बहस उठ रही है, और यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या यह कानून लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं पर भारी पड़ेगा?

यह नया आपराधिक कानून, जो 345 पन्नों में विस्तृत है, 2022 में पास किया गया था और अब यह पुराने डच औपनिवेशिक कानूनों को प्रतिस्थापित करेगा. इस कानून के लागू होने की तैयारी कई दशकों से चल रही थी, और यह पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो के कार्यकाल के आखिरी सालों में पारित किया गया था. कानून मंत्री सुप्रतमान आंदी अग्तास ने इस कानून के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि यह देश की संस्कृति और आधुनिक कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इसके गलत इस्तेमाल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.

शादी से पहले संबंध और अपमान पर कड़ी सजा

इस नए कानून के तहत, शादी से पहले यौन संबंध बनाना अब अपराध हो सकता है और इसके लिए एक साल तक की सजा हो सकती है. हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं. अगर यह अपराध शादी से पहले होता है, तो केवल तभी मामला दर्ज किया जाएगा जब पति, पत्नी, माता-पिता या बच्चों में से कोई इसकी शिकायत करता है. अभी तक इंडोनेशिया में केवल शादी के बाद बेवफाई को अपराध माना जाता था. यह प्रावधान खासतौर पर उन लोगों के लिए विवादास्पद हो सकता है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन शैली के अधिकारों को लेकर चिंतित हैं.

हालांकि, यह कानून पर्यटन उद्योग के लिए राहत की खबर है. टूरिज्म संगठनों का कहना है कि क्योंकि इस नए कानून में शिकायत की शर्त रखी गई है, इसलिए विदेशी पर्यटक सीधे इस कानून के दायरे में नहीं आएंगे. इसका मतलब यह है कि अगर कोई विदेशी शादी से पहले यौन संबंध बनाता है, तो वह सीधे इस कानून के तहत दंडित नहीं होगा, जब तक कि संबंधित परिवार से शिकायत नहीं आती.

राष्ट्रपति और सरकारी संस्थाओं का अपमान भी अपराध

नए आपराधिक कानून में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सरकारी संस्थाओं का अपमान करना अब अपराध माना जाएगा. इस अपराध के लिए तीन साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है. यह कदम सरकार की प्रतिष्ठा और सम्मान को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है.

इसके अलावा, कम्युनिज़्म का प्रचार, जो कि देश की आधिकारिक विचारधारा के खिलाफ माना जाता है, अब चार साल तक की सजा का कारण बन सकता है. इस कानून के अंतर्गत मानहानि और बदनामी जैसी व्यापक परिभाषाओं को शामिल किया गया है, जो इनसाफ और सामाजिक न्याय की प्रक्रिया में उलझन पैदा कर सकती हैं. यही व्यापक परिभाषाएं सबसे ज्यादा विवादों का कारण बन रही हैं. कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह नए कानून का दुरुपयोग करने का रास्ता खोल सकता है, खासतौर पर जब कोई सरकार या राष्ट्रपति के खिलाफ आलोचना की जाती है.

सरकार ने स्वीकार किया दुरुपयोग का खतरा

इंडोनेशियाई सरकार ने इस नए कानून को लागू करते वक्त कुछ सर्तें रखी हैं. कानून मंत्री ने स्वीकार किया कि कोई भी नया कानून शुरुआत में हमेशा पूरी तरह से परिपूर्ण नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अब जनता की निगरानी की होगी, क्योंकि यदि समाज और नागरिक सक्रिय रूप से नजर रखेंगे, तो इस कानून का दुरुपयोग रोकने में मदद मिल सकती है.

सरकार का दावा है कि पुलिस और अन्य कानून लागू करने वाले अधिकारियों को इस नए कानून के बारे में पूरी जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि नागरिकों के अधिकारों का दुरुपयोग न हो. इसके बावजूद, कुछ विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठाया है कि क्या नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा की जाएगी, खासकर जब सरकार और कानून का इस्तेमाल राजनीतिक और व्यक्तिगत विरोधियों के खिलाफ किया जा सकता है.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संकट

कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नए कानून में मानहानि और अपमान की परिभाषाएं बहुत ही व्यापक और अस्पष्ट हैं, जो सरकार और राष्ट्रपति के आलोचकों पर कार्रवाई का रास्ता खोल सकती हैं. इसे लेकर कुछ विश्लेषकों ने इसे नया औपनिवेशिक कानून करार दिया है, यह कहते हुए कि यह अब विदेशी शासकों द्वारा नहीं, बल्कि अपने ही देश की सरकार द्वारा बनाया गया कानून है. हालांकि, उनका मानना है कि इसका असर वही होगा, जो पहले औपनिवेशिक कानूनों का हुआ था, यानी सत्ता को नियंत्रित करने का तरीका वही रहेगा, भले ही सरकार अपनी हो.

इसी प्रकार, सरकार की आलोचना करने वाले नागरिकों को इस कानून के दायरे में लाकर उनकी आवाज़ को दबाने का भी खतरा हो सकता है. इसके साथ ही, इस कानून से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांसदों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के काम में भी बाधाएं आ सकती हैं.

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