नई दिल्ली: भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए रूस से बड़े पैमाने पर मिसाइलों की खरीद की योजना बना रहा है. इस योजना के तहत भारतीय रक्षा मंत्रालय S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की मिसाइलों का स्टॉक बढ़ाने के लिए करीब 300 मिसाइलों की खरीद पर विचार कर रहा है. यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए इस्तेमाल और मिसाइलों की खपत की भरपाई के लिए जरूरी माना जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, यह डील 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की होगी और वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूरी होने की उम्मीद है. रक्षा मंत्रालय ने इस डील को फास्ट ट्रैक प्रक्रिया में रखा है और सीएनसी (कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी) और सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी मिलने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.
S-400 और पैंटसिर: वायु रक्षा प्रणाली का विस्तार
भारत केवल S-400 मिसाइलों तक ही सीमित नहीं रहना चाहता. भारतीय सेना रूस के पैंटसिर एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर भी विचार कर रही है. पैंटसिर सिस्टम को ड्रोन, हल्के लड़ाकू विमानों और छोटे हवाई खतरों से निपटने के लिए प्रभावी माना जाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि S-400 और पैंटसिर सिस्टम को एक साथ तैनात करने से भारत की दोहरी वायु रक्षा प्रणाली बन सकती है, जो सीमा पार से आने वाले किसी भी प्रकार के हवाई हमले को रोकने में सक्षम होगी. इस दिशा में भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय के बीच चर्चा चल रही है और जल्द ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.
मोदी-पुतिन मुलाकात और आपातकालीन खरीद
5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली बैठक में किसी बड़े रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर होने की संभावना कम बताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा योजना के तहत लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों की आपातकालीन खरीद अलग से की जाएगी, जिससे भारत की वायु सुरक्षा को तत्काल बढ़ावा मिलेगा.
ऑपरेशन सिंदूर और S-400 का प्रदर्शन
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का सक्रिय उपयोग किया था. इसके माध्यम से पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों, ड्रोन और खुफिया विमान को निशाना बनाने में सफलता मिली. इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए विशेषज्ञों और सेना के अधिकारियों ने इस सिस्टम के अतिरिक्त यूनिट की खरीद की सिफारिश की थी.
S-400 मिसाइल सिस्टम की क्षमता, लंबी दूरी तक हवाई लक्ष्य को नष्ट करने की है, और इसे आधुनिक युद्ध में एक निर्णायक उपकरण माना जाता है. ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन मिसाइलों की संख्या बढ़ाने से भारत की वायु रक्षा रणनीति और अधिक सुदृढ़ होगी.
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