"भारत के रुख पर कोई भ्रम न रहे", विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्रंप के 'मध्यस्थता' दावे पर साधा निशाना

Jaishankar On Pakistan Mediation: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और संघर्ष विराम की स्थिति को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा गर्म है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई कथित मध्यस्थता की पेशकश पर भारत ने दो टूक जवाब दिया है.

India stand Foreign Minister Jaishankar hits out at Trump mediation claim
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Jaishankar On Pakistan Mediation: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और संघर्ष विराम की स्थिति को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा गर्म है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई कथित मध्यस्थता की पेशकश पर भारत ने दो टूक जवाब दिया है. विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों में कभी किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्वीकार नहीं करता और न ही करेगा.

एक कार्यक्रम के दौरान डॉ. जयशंकर ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा, “भारत-पाकिस्तान मुद्दों पर हमारी नीति पिछले 50 वर्षों से बिल्कुल स्पष्ट रही है. हम किसी भी प्रकार की मध्यस्थता नहीं मानते. यह बात राष्ट्रीय सहमति का हिस्सा है, और इसमें कोई बदलाव नहीं होने वाला.”

भारत की ‘रेड लाइन्स’ हैं स्पष्ट

डॉ. जयशंकर ने यह भी साफ किया कि भारत का रुख सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में भी उसकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं. उन्होंने कहा कि भारत की कुछ “लाल रेखाएं” हैं, विशेषकर किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों को लेकर. इन सीमाओं से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, “हम अपने किसानों की कीमत पर किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे. चाहे वह अमेरिका हो या कोई और देश.” 

‘ट्रंप की विदेश नीति का तरीका अपवाद रहा है’

डॉ. जयशंकर ने डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति के तौर-तरीकों पर भी खुलकर टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “हमने ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा जो विदेश नीति को इतनी सार्वजनिक और व्यक्तिगत शैली में चलाता हो.” उन्होंने इसे एक "पारंपरिक रुझानों से हटकर बड़ा बदलाव" करार दिया.

व्यापार पर भी बात करते हुए उन्होंने कटाक्ष किया, “अगर आपको भारत से तेल या रिफाइंड उत्पाद नहीं खरीदना है, तो न खरीदें. कोई आपको मजबूर नहीं कर रहा. लेकिन जो खुद व्यापार के हिमायती बनते हैं, वे दूसरों पर व्यापार को लेकर उंगली उठाएं, ये हास्यास्पद है.”

‘किसानों और व्यापारियों के साथ कोई समझौता नहीं’

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सरकार अपने किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा को सर्वोपरि मानती है. उन्होंने दोहराया, “हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जहां बात हमारे किसानों के हितों की हो, वहां कोई समझौता नहीं होगा.” 

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