Retail Inflation: भारत में सितंबर 2025 के महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर 1.54% पर आ गई है, जो पिछले महीने अगस्त में दर्ज 2.07% की तुलना में काफी कम है. यह आंकड़ा 2017 के जून महीने के बाद से सबसे निचले स्तर का है, जो दिखाता है कि देश में खाद्य पदार्थों सहित कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार कमी आई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2 से 6 प्रतिशत के टारगेट से यह महंगाई दर काफी नीचे है, जिससे आर्थिक स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं.
महंगाई में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई निरंतर कमी है. खाने-पीने की वस्तुएं, जो कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का लगभग आधा हिस्सा होती हैं, सितंबर 2025 में 2.28% की नकारात्मक महंगाई दर पर आ गई हैं, जबकि अगस्त में यह -0.69% थी. सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतें अप्रैल 2025 से लगातार दोहरे अंकों में गिर रही हैं. इस वजह से उपभोक्ता वस्तुओं की कुल कीमतों पर दबाव कम हुआ है.
विशेष रूप से सब्जियों की कीमतें पिछले कई महीनों से तेजी से गिर रही हैं, जो घरेलू बाजार में आपूर्ति बेहतर होने और मौसमी उत्पादन के बढ़ने के कारण संभव हुआ है. इसके अलावा, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी ने उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को बढ़ाने में मदद की है.
बाजार और अर्थशास्त्रियों की पूर्वानुमान तुलना
रॉयटर्स द्वारा किए गए सर्वे में 38 अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि सितंबर 2025 में रिटेल महंगाई दर लगभग 1.70% तक घट सकती है. लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे भी कम निकला, जो आर्थिक परिस्थितियों की बेहतर समझ का संकेत है.
अर्थशास्त्रियों का मानना था कि इस साल अगस्त तक महंगाई को नियंत्रित करने वाला आधार प्रभाव (base effect) समाप्त हो जाएगा, जिससे महंगाई की दर में फिर वृद्धि देखने को मिलेगी. लेकिन सितंबर के आंकड़ों ने दिखाया कि खाद्य वस्तुओं की कीमतें पिछले साल के मुकाबले नियंत्रण में हैं और यह रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना है.
जीएसटी सुधारों का प्रभाव
महंगाई में आई कमी में वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में हाल ही में हुए सुधारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. जीएसटी दरों को कम करने और प्रक्रिया को सरल बनाने से कई उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे महंगाई पर नियंत्रण संभव हो सका है.
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी महंगाई दर की पूर्वानुमान दर को अगस्त में 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया था. सितंबर के ताजा आंकड़े इससे भी बेहतर हैं, जो संकेत देते हैं कि कीमतों पर दबाव कम रहने की संभावना है.
आरबीआई के रवैये में बदलाव के संकेत
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अक्टूबर के शुरूआती दिनों में कहा था कि हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी, जिससे महंगाई दर और कम हो सकती है. इस बात से भी स्पष्ट है कि सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतियां बाजार में स्थिरता और नियंत्रण के लिए कारगर साबित हो रही हैं.
चूंकि महंगाई दर RBI के 4% के मिड-टर्म टारगेट से काफी नीचे बनी हुई है, इसलिए अर्थशास्त्री मानते हैं कि अब नीति निर्माता आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे. इसी कड़ी में, दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की उम्मीद जताई जा रही है. इस साल की शुरुआत से अब तक RBI ने कुल 100 बेसिस पॉइंट की कटौती कर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया है.
महंगाई घटने के व्यापक प्रभाव
महंगाई दर में आई यह गिरावट उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है. खाद्य वस्तुओं और अन्य आवश्यक सामानों की कीमतों में कमी से घरेलू खर्चों पर दबाव कम होगा, जिससे आम जनता की जीवनशैली बेहतर हो सकती है. इसके अलावा, महंगाई नियंत्रण में रहने से केंद्रीय बैंक को मौद्रिक नीति को नरम रखने में सुविधा मिलेगी, जो निवेश और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करेगा.
निम्न महंगाई दर विदेशी निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत है, क्योंकि यह आर्थिक स्थिरता और नीतिगत विश्वास को दर्शाती है. इसके परिणामस्वरूप भारत की आर्थिक विकास दर में सुधार की संभावना बढ़ती है.
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