BCCI Fitness System: भारतीय क्रिकेट टीम लंबे समय से अपनी मजबूत बेंच स्ट्रेंथ और बेहतरीन खिलाड़ियों के लिए जानी जाती रही है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में एक ऐसी समस्या सामने आई है जिसने चयनकर्ताओं से लेकर टीम प्रबंधन तक सभी की चिंता बढ़ा दी है. टीम इंडिया के खिलाड़ी लगातार चोटों का शिकार हो रहे हैं और इसका असर सीधे टीम के प्रदर्शन पर पड़ता दिखाई दे रहा है. इंग्लैंड दौरे के दौरान भी कई अहम खिलाड़ी चोटिल हुए, जिसके बाद अब सवाल सिर्फ खिलाड़ियों की फिटनेस पर नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि फिटनेस प्रबंधन और मेडिकल समन्वय में कमी के कारण खिलाड़ियों को पूरी तरह स्वस्थ हुए बिना ही मैदान पर उतारा जा रहा है.
शुभमन गिल ने भी जताई चिंता
इंग्लैंड के खिलाफ टी20 और वनडे सीरीज के दौरान कई खिलाड़ियों के चोटिल होने के बाद भारतीय वनडे कप्तान शुभमन गिल ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया. टीम में लगातार बढ़ रही इंजरी की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि समस्या केवल संयोग नहीं बल्कि सिस्टम से जुड़ी हो सकती है. इंग्लैंड दौरे पर नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी चोटों से जूझते रहे. इससे टीम संयोजन पर भी असर पड़ा और मैनेजमेंट को बार-बार बदलाव करने पड़े.
फिटनेस को लेकर रिपोर्ट में बड़ा दावा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय खिलाड़ियों में बढ़ रही हैमस्ट्रिंग और अन्य मांसपेशियों से जुड़ी चोटों की एक बड़ी वजह यह हो सकती है कि कई खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट घोषित किए बिना ही खेलने की अनुमति दे दी गई. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खिलाड़ियों की रिकवरी प्रक्रिया पूरी होने से पहले उन्हें मैचों में उतारने के फैसले लिए गए, जिससे चोट दोबारा उभरने या और गंभीर होने का खतरा बढ़ गया. बीसीसीआई के सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि टीम इंडिया और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच बेहतर समन्वय की कमी महसूस की जा रही है.
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की व्यवस्था पर उठे सवाल
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नितिन पटेल के पद छोड़ने के बाद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अब तक मेडिकल स्टाफ के प्रमुख की नियुक्ति नहीं की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि किसी स्थायी मेडिकल प्रमुख की अनुपस्थिति खिलाड़ियों की फिटनेस मॉनिटरिंग और रिकवरी प्लान पर असर डाल सकती है. ऐसे में खिलाड़ियों की मेडिकल रिपोर्ट, रिकवरी टाइमलाइन और टीम मैनेजमेंट के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है.
हर्षित राणा की फिटनेस पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई हर्षित राणा की चोट को लेकर खासा चिंतित है. दावा किया गया है कि घुटने की चोट के बाद वह अभी पूरी तरह अपनी पुरानी शारीरिक स्थिति में नहीं लौटे थे. उनका बॉडी वेट भी चोट से पहले वाले स्तर तक नहीं पहुंचा था, इसके बावजूद उन्हें खेलने की अनुमति मिल गई. मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि टीम मैनेजमेंट की जरूरतों और दबाव के कारण उन्हें मैदान पर उतारने का फैसला लिया गया. यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह फिटनेस प्रबंधन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
नीतीश कुमार रेड्डी भी बार-बार हुए चोटिल
रिपोर्ट में नीतीश कुमार रेड्डी का भी उल्लेख किया गया है. लगातार चोटिल होने के कारण उनकी उपलब्धता प्रभावित हुई और इससे टीम के संतुलन पर असर पड़ा. बार-बार एक ही तरह की चोटें खिलाड़ियों के लिए लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकती हैं और उनके करियर पर भी प्रभाव डाल सकती हैं.
वॉशिंगटन सुंदर को लेकर भी सामने आई जानकारी
रिपोर्ट में वॉशिंगटन सुंदर को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है. बताया गया है कि उन्हें टी20 विश्व कप के लिए जल्दबाजी में टीम में शामिल किया गया, जबकि वह पूरी तरह मैच फिट नहीं थे. दावा है कि टीम से जुड़ने के बाद उन्हें पूरी तरह मैच खेलने लायक फिट होने में करीब दस दिन लगे. इस दौरान टीम प्रबंधन की ओर से टूर्नामेंट के बीच ही उन्हें जल्दी तैयार होने का दबाव भी रहा. यदि ऐसा हुआ है तो यह खिलाड़ियों की लंबी अवधि की फिटनेस के लिए जोखिम भरा कदम माना जा सकता है.
बढ़ती चोटें टीम इंडिया के लिए चेतावनी
भारतीय क्रिकेट टीम के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ती चोटें भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं. यदि खिलाड़ी पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान पर उतरते हैं तो इससे न केवल उनका प्रदर्शन प्रभावित होता है, बल्कि करियर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बीसीसीआई फिटनेस प्रबंधन, मेडिकल निगरानी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगा ताकि खिलाड़ियों को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी का मौका मिले. आने वाले समय में इस मुद्दे पर बोर्ड के कदम भारतीय क्रिकेट की फिटनेस संस्कृति के लिए अहम साबित हो सकते हैं.